राह में हैं कटीले कंकड़ ,तो क्या चलना बंद कर दूँ
ख़बरें छपी है फरेब की ,तो क्या पढना बंद कर दूँ ....//
मैं झूठ का तड़का नहीं लगाता, सच की दाल में
उन्हें बुरा लगता है ,तो क्या लिखना बंद कर दूँ ...//
सारी दुनिया पीछे पड़ी है,सच का गला दबाने में
नहीं मरता सच , तो क्या मैं उसे नज़रबंद कर दूँ ॥//
तुफानो से टकराने में भला किश्ती,कब डरा करती है
पडोसी सुनते हैं मेरी बात ,तो क्या मैं खिड़की बंद कर दूँ ...//