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सोमवार, 29 सितंबर 2014

शब्द



लाखों करोड़ों शब्द है
कुछ नफरत के
कुछ प्यार के
तो कुछ मनुहार के भी
नफरत के शब्द सजा दो
तो गाली
प्यार के शब्द सजा दो
तो मोहब्बत हो जाता है
कुछ शब्द झूठ के भी है
तो कुछ शान्ति वार्ता के भी
कुछ शब्द आदर के है
तो कुछ अनादर के भी
शब्दों को सजाने की कला ने
कभी किसी को कवि बनाया
तो किसी को झूठा
शब्दों की सजावट ने
कभी क्रांति की बिगुल फूकी
तो कभी शान्ति की पहल की
आईए....
हम शब्दों se  ईश्क  करे

शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

फिदरत

रंग बदलने को यहां ,कितने लोग है सारे
वादा कर  नहीं ला पाते ,वे चाँद- सितारे  //

चुटकियों में तोड़ देते हैं, लोग अग्नि के फेरे
बस, यु ही कहते रहते हैं, मैं तेरा ,तुम मेरे //

रोज बदलते है, लोग यहां कितने भेष ऐ बबन
तोड़ लेते है फूल , चाहे उजड़ जाए ये  चमन //

बुधवार, 25 जून 2014

^^^^^ गॉव की लड़की और शादी का फोटो^^^^

 सकुचाती है
शर्माती है 
गॉव की लड़की 
शादी के लिए अपना फोटो खिचाने से पहले 
जिसे लड़के वालों को देना है...//

यु तो वह हमेशा खिलखिलाती रहती है...
मगर गंभीर हो गई है कैमरे के सामने
वह अनभिज्ञ है इस बात से
ख़राब फोटो से बात बिगड़ सकती है

वह शहर की लड़की से अलग है
नहीं दिखाना चाहती अपने उरोज
नहीं दिखाना चाहती अपनी बाहें स्लीवलेस ब्लाउस में
नहीं खुला रखना चाहती अपनी बाल
नहीं पोतना चाहती अपने अधरों में लाली

और हम सब   उसके साथ
जबरजस्ती किये जा रहे है //

शनिवार, 21 जून 2014

^^^रंग बदलते बादल और तुम ^^^



उजले बादलों की तरह उड़ती हो !
जब शांत होती हो ..
थोड़ा सा गुस्सा ...
फिर लाल बादलों की तरह दिखती हो
और जब प्यार करती हो
काले बादलों की तरह लगती हो
खूब प्यार बरसाने वाली ...

मेरे प्रिय ! मुझे गर्व है तुम पर
तुम बादलों की तरह रंग बदलती हो
गिरगिट की तरह नहीं

बुधवार, 11 जून 2014

" अखबार "

सोचता  हूँ
कब  पढ़ पाउँगा .
अखबार ....
जिसमे न छपी हो ..
दुष्कर्म की कहानी ..
महगाई की मार..
हिन्दू-मुस्लिम के बीच मार-काट की ख़बरें
जेब-कटाई की ख़बरें//

जिसमे लिखा  मिले..
सबको पीने का पानी मिल गया...
सबको रहने को घर हो गया
गंगा निर्मल हो गई ...
नेता जो बोलेंगे /वही करँगें
बूढ़े माँ बाप बेटे के घर में रहने लगे //

मुझे इंतज़ार है ...
एक ऐसे अखबार के छपने का


रविवार, 8 जून 2014

मन

मन
बुनता है जाल
रोकता है रास्ता
इंसान को फंस कर गिरता देख
हँसता है मन //

पता  नहीं कब...
मन बना लेता है
घोटाले का प्लान
अपहरण की साजिश
और कर बैठता  है
दुष्कर्म /बलात्कार और हत्या //

सच में ...
जलेबी की तरह है
मन की बनावट

मंगलवार, 27 मई 2014

तुम हो अंग्रेजी अखबार //

तुम हो  अंग्रेजी  अखबार
करती हो अँखियों से बार //

जब कोई आता मेहमान
नहीं पूछती चाय-पान
तेरे ओठों की बड़-बड़ से
दिल हो जाता तार-तार
तुम हो अंग्रेजी  अखबार //

आता है जब  भाई तेरा
हर थकावट होती छू-मंतर
सब्जी चार पकाकर तुम
रोटी पर घी लगाती बार-बार
तुम हो अंग्रेजी अखबार //

शुक्रवार, 23 मई 2014

कब आएगी खुशबू इन मकानों से

कोई खुशबु नहीं होती...
सीमेंट में
बालू में
बजरी में
और लोहे की सरियों में
मगर...
जब सब मिलते है तो
बनता है मकान //

मकान.... 
भींगने  से बचने के लिए नहीं है...
मकान....
तलाक के कागज पर दस्खत करने की जगह नहीं है 
मकान ....
दुश्मन को परास्त करने का प्लान बनाने की जगह भी नहीं ..

मकान  तो एक गर्भ है..
जहां ..
प्रेम और प्यार का बीज पनपता है ..//

और जब... 
यह पनपता है..
तो आने   लगती  है खुशबु  मकान से     

गुरुवार, 8 मई 2014

मौसम आज रूमानी है...



नभ से टपकता पानी है
मौसम आज रूमानी है...

तरु के पत्तों ने गाया कलरव
हरीतिमा का रंग लेकर
नभचर प्रचोदित हो गए
श्वेत बादलों का पंख लेकर
देह चुप है, पर दिल करता शैतानी है ..
मौसम आज रूमानी है... 

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

कुत्ते घोसला नहीं बनाते !

कुत्ते  घोसला  नहीं  बनाते  !
बुझे राख की आग पर बैठ
गुजार लेते है अपना वक़्त

चुप रहते है
जब तक खिलाता  है कोई
मख्खनदार बिस्कुट

खाने के लिए
पिने के लिए
और झगड़ पड़ते है
किसी कुतिया के लिए भीं

गौर फरमाएं ...
शायद की कोई
हिन्दू गली का कुत्ता
मुसलमान को देखकर ना भूके
या फिर मुस्लिम गली का कुत्ता
हिंदुओं  को देखकर//

और सबसे बड़ी बात
सिर्फ सड़क छाप कुत्ते ही नहीं
पालतू कुत्ते भी काट लेते है
मालिक को

वैसे कुत्ते चुनिए
जो भौकने के अलावे
और भी कुछ जानता हो
और
न करता  हो पेशाब इधर-उधर
अपनी टांगें उठाकर //
 

रविवार, 2 फ़रवरी 2014

आग से

तुम कितने डरपोक हो आग
घर भी जलाते हो तो गरीबों का //

देखो तो ..
तुम्हारे सात फेरे लेकर
किये गए वादे
टूट रही है भरभराकर

तुम गला देते हो .
लोहे और अलमुनियम
बना देते ही ईट
कच्ची मिटटी से
तुम कब जला पाओगे
आदमी  के लोभ/लालच/काम/क्रोध
मगर !
और धन लोलुप्ता
तुम्हारा कमाल एक ही बार दिखा है ..
जब प्रह्लाद को न जलाकर
,तुमने जला दिया था होलिका को //

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

हर कोई सिखाता है ,गिर कर उठने का हुनर
फिर पता चलता है
सिखाने वाला खुद गिरा हुआ था //

हर कोई सिखाता है ,सत्य पर चलने का हुनर
फिर पता चलता है
सिखाने वाला अनाड़ी था//

हर कोई संकल्प दिलाता है ,चोरी  करना पाप है
फिर पता चलता है ..
सीखने वाला चोरो का सरदार है //

बाबा और संत सिखाते  है ,चरित्र दृढ रखने के गुण
फिर पता चलता है
उनसे ज्यादा चरित्र हिन् कोई नहीं //

शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

इन्द्रियाँ

पौरुष इन्द्रियाँ
सुसुप्त ज्वालामुखी होती हैं ..
पता नहीं..कब भड़क उठे

यह ज़रूरी  नहीं
स्पर्श हो ही किसी सुंदरी का
हो सकता है
यह जाग उठे ,सिर्फ घुंघुरू की आवाज  से
प्रचोदित हो  उठता है
मोहक गंध से
या फिर किसी भवरे को
फूलों पर बैठा देखकर ...

कितना आसान होता है
किसी का दिल जीतना
असली विजेता तो वही है ..
जिसने जीत लिया इंद्रियों को //

एक बूढ़े बिहारी बाप की अंत:व्यथा

बेटा!!
अमेरिका से कब लौटोगे..

मुझे नही पता..
9/11 क्या होता है..
मगर सुना है..इसके बाद
अमेरिका मे रहने वाले मुसलमान..
शक के दायरे मे है...

हम लोग भी मुसलमान है बेटा..
वहा ऐसा -वैसा मत कर देना..
जिससे इस देश को फ़ज़ीहत उठानी पड़े..
सुना है, ..कुछ दिन पहले ..
न्यूयॉर्क के टाइम्सस्क्वेर पर..
बम के साथ एक पाकिस्तानी पकड़ाया है....

मैने तुम्हे गोद मे खिलाया है..
और इस्लाम की सही तालीम दी है...
पर डरता हू ...कि...
पैसे की चकाचोंध ने ...
बदल ना दिया हो तुम्हे...

और सुनो .....
तुम जो पैसा भेजते हो ना ....
वह बंद कर दो...बेटा..
शायद तुम्हे पैसे की ज़्यादा ज़रूरत हो..
जुम्मन की वेवा को 10 लाख मिले है.
नक्शली हिंसा मे शहिद हो गया.
था.... अपना जुम्मन....
मुझे गम नही बेटा...
कमसे कम ोगो को..
यह यकीन तो हो ही गया. है...
कि .....
किशनगंज के मूसलमान..
सरपरस्तो के मददगार नही है.

सरकार उसकी वेवा को..
नौकरी देने की बात कहती है...
तुम्हारा भतीजा अंसार..
बगल के आगनवाडी केंद्र मे जाता है..
वहा खाना भी मिलता है..

रोज नमाज़ अदा करते हो ना बेटा!!
गंदी बाते मन मे आती भी नही...


तुम्हारी अम्मी जब लौट कर .
आई थी तुम्हारे पास से..
कहती थी....
वहा तो पता ही नही चलता ..
अज़ान का...
किशनगंज मे तो तुम्हारी अम्मी..
अज़ान के साथ ही उठती थी....
खैर,, छोड़ो बेटा ...
अब वतन लौट जाओ ..

अब बिहार मे भी अमन शान्ति है...
यहा बी०जे०पी और जद(यू) की सरकार है..
अच्छा काम कर रही है...
सुना है...
किशनगंज मे और बिहारशरीफ़ मे.....
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ..
एवम नालंदा यूनिवर्सिटी खुल रहा है...
आओ ... इन दोनो जगहो .....
कही न कही नौकरी मिल ही जायगी...

अगर.....
नही भी मिलता है....
चाय की खेती करेगे..
यहा कुछ किसान चाय की खेती कर रहे है..
सिललीगुडी मे चाय की मार्केट है.

जुम्मन का दोस्त कह रहा था..
गावो मे इंटरनेट लग गया है...
सुना है....
अगर ईमेल पता हो..तो..
मिनटो मे बात होती है...
भेज देना ..बेटा !!!!


the poem depicts the pitiful condition of very old father belonging to a muslim family of kisangunj district in bihar. his one son was dead in a ambush of naxalites against police.
one of his son dwells in US.. he is afraid..because a young pakistani had been arrested in TIMES SQUARE of US. he is happy with current political sitution of BIHAR... and urges him to return to his native village and requests him to join the newly opened the branch of AMU and NALANDA UNI........

बुधवार, 29 जनवरी 2014

नेता और बसंत



हर फल चखते नेता
हर गंध सूंघते नेता
जनता को समझते
धोबी का गदहा , नेता //

हर जीत उनका बसंत
हर हार ,उनका पतझड़
आंदोलन है ,उनका डिग्री
चक्का जाम है, उनको भाता//

गठबंधन की नाव चलाते
बात-बात पर चुटकी लेते
बैठक में सबकी  सुनते
विश्व्वास मत से, उनको फायदा //   

रविवार, 19 जनवरी 2014

प्लास्टिक के फूल

बातों का जहर ...
उगलती है ...
सास-बहू
हम और आप
सत्ता दल विपक्षी  नेताओ पर //

मगर हम जो जहर छोड़ रहे है
फूलों पर ...
उसे चूस
मर रही  है मधुमक्खियां ..
मर रही हैं तितलियाँ भी ..
फूलों का गंध भी  बारूदी  लगता है //

मेरे दोस्त !
नाराज मत होना ...
जब मैं तुम्हें अब
प्लास्टिक के फूल
स्वागत में दू   तो ...
  

सोमवार, 6 जनवरी 2014

मुझे तलाश है ...

मुझे तलाश है ...
एक सर्व गुण  संपन्न सेकुलर भगवान् की
या फिर सेकुलर तारणहार  की
गरीबी दूर करने के लिए नहीं
औधोगिक विकास के लिए नहीं
बल्कि ....
जो मुहफट नेताओं की ज़वान सील सके
 जो बालात्कारियों के इरादे और इंद्रियों को नपुंसक बना सके
जो भ्रस्त्रचारियों को राहत देने वाले
हुक्मरानों की कलम  तोड़  सके
जो अपराधियों को सज़ा दिलाने के लिए
कोर्ट को ज़रूरी साक्ष्य जुटा सके  
..

मुझे विश्वास है
अगर ऐसे भगवान् प्रगट होते है
तो .
.पत्थर के भगवानों से लोग हाथ जोड़ लेंगे...//

मेरे बारे में