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शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

इन्द्रियाँ

पौरुष इन्द्रियाँ
सुसुप्त ज्वालामुखी होती हैं ..
पता नहीं..कब भड़क उठे

यह ज़रूरी  नहीं
स्पर्श हो ही किसी सुंदरी का
हो सकता है
यह जाग उठे ,सिर्फ घुंघुरू की आवाज  से
प्रचोदित हो  उठता है
मोहक गंध से
या फिर किसी भवरे को
फूलों पर बैठा देखकर ...

कितना आसान होता है
किसी का दिल जीतना
असली विजेता तो वही है ..
जिसने जीत लिया इंद्रियों को //

1 टिप्पणी:

  1. पहले पुरुष होना भी जरूरी होता होगा ना इसके लिये पर पता कहाँ चलता है :P

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