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रविवार, 2 फ़रवरी 2014

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

हर कोई सिखाता है ,गिर कर उठने का हुनर
फिर पता चलता है
सिखाने वाला खुद गिरा हुआ था //

हर कोई सिखाता है ,सत्य पर चलने का हुनर
फिर पता चलता है
सिखाने वाला अनाड़ी था//

हर कोई संकल्प दिलाता है ,चोरी  करना पाप है
फिर पता चलता है ..
सीखने वाला चोरो का सरदार है //

बाबा और संत सिखाते  है ,चरित्र दृढ रखने के गुण
फिर पता चलता है
उनसे ज्यादा चरित्र हिन् कोई नहीं //

6 टिप्‍पणियां:

  1. और हम जैसे कुछ अनाड़ी भी तो होते हैं जो ताजिंदगी कुछ नहीं सीख पाते हैं !

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  2. आभार सुशील भाई ..आप सही कह रहे हैं

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  3. ज़िन्दगी जीने के लिये है...पल दो पल...जो खुद सीखना चाहे वो ही सीख सकता है...ज़िन्दगी की किताब में हर एक के फॉर्मूले अलग हैं...कोई एक सिद्धांत सब पर लागू नहीं होता...

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  4. किसी दूसरे के चरित्र को क्या देखना .. अगर बात अच्छी है तो अपना लेना चाहिए ...
    अच्छी रचना ...

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  5. आपसे पूरी तरह सहमत हूँ ... वाणभट्ट जी

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  6. आपने काफी सुन्दर लिखा है...
    इसी विषय Prime minister Modi and Yoga से सम्बंधित मिथिलेश२०२०.कॉम पर लिखा गया लेख अवश्य देखिये!

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