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मंगलवार, 9 नवंबर 2010

प्यार का पहला बीज


शायद तुम्हें याद हो
दौड़ चली थी तुम
चांदनी रेत पर
मानो पैर नहीं
एक जोड़ा पंख हो ॥

उड़ने लगी थी तुम
उस ऊर्जा के बल पर
जो मैंने तुम्हें दी थी
अपनी हथेलियो से
तुम्हारी हथेलियों में
जो मेहँदी के रंग से जवान था ॥

गुजर गई थी सारी रात
कापते लवों को रोकने में
पहली बार
थरथराया था मेरा शरीर
पहली बार पढ़ा था मैंने
किसी के आंखों की भाषा
और शायद
हमदोनो ने बो दिया था
प्यार का पहला बीज ॥

41 टिप्‍पणियां:

  1. aankhon ki bhasha padh li jaye phir beej ankurit hone hi hai...
    sundar rachna!

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  2. बहुत खूब बबन जी..........बहुत बढिया.........आँखों की भाषा ही ऐसी होती हैं.....पढ़ना आ जाये तो बात ही क्या है .......इसीलिए गाने भी बहुत लिखे गए इस पर.....इनमे से एक जो मुझे याद आ रहा हैं इस वक्त.........
    आँखों ही आँखों में इशारा हो गया
    बैठे-बैठे जीने का सहारा हो गया।

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  3. Baban ji pyar se aut prot ek bahut hi sunder ahsaas se paripurn rachna, pyar me aankhon ki baatain samjh me aane lagti hai to phir jeevan me khushio ki bahar aa jaati hai, jab ham bina kuch kahe sathi ke mun ki baat samjhne lagte hai, to phir jeevan pyar ki khushboo se bhar jaata hai...............

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  4. बहुत रूमानी सी रचना ...बेहद कोमल भावों को लिए हुए

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  5. बबन जी! अत्यंत कोमल और उर्जावान रचना है... सच है प्यार में बहुत उर्जा होती है इतना कि भगवान् भी दौरे चले आते हैं सो आप-हम जैसे लोग इस 'उर्जा' को पाकर बेसुध तो हो ही जायेंगे...और उसपर पहली नज़र का प्यार....अदुइतीय, अद्भुत और अवर्णीय होता है आपने तो इसे शब्दों में जड़कर कमाल ही कर दिया.....प्रार्थना है प्यार हमेशा ही फलता-फूलता रहे...यों ही....
    सादर

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  6. वाह क्या बात है…………पहले प्यार के भीने अहसासों को बहुत खूबसूरती से पिरोया है।

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  7. बहुत ही सुन्दर रचना भाई साहब! क्या कहने आपकी इन प्यारी पंक्तियों के..गुजर गई थी सारी रात कापते लवों को रोकने में...वाह लाजबाब!

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  8. बबन जी, ..बहुत खूब.......एक गाना याद आ गया .......
    पहला नशा ,पहला खुमार........
    नया प्यार है नया इंतज़ार ......
    उडती ही फिरूं इन हवाओं में कहीं.....
    या में झूल जाऊं इन घटाओं में कहीं.....
    ......and the TRUTH is LOVE CONTINUES TO GROW!!!!

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  9. very sweet...... dil ki sundar bhavnaon ko darshati hui sundar rachna .... speechless .....

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  10. सुनहरे एहसास .बहुत सुन्दर रचना.

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  11. आपकी रोमांटिक रचना ने नशा सा तारी कर दिया है
    बब्बन जी,अति सुन्दर,मधुर,मदिर,कोमल श्यामल,
    "दौड़ना उड़ना पंख,उर्जा जवानी मेंहदी का रंग,
    गुजरती रात,कांपते लव थरथराया शारीर,
    आँखों की भाषा,प्यासी अभिलाषा,प्यार का बीज."

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  12. ati sundar prem prinay se susajit aur prem ki urja se premi ek dusre ke liye adhbut si karya bhi kar gujarne ki hoshla rakhte hain.yah bhab apke rachna me mila.bahut khub sir................

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  13. Prem ko paribhashit karti hui ek apratim rachna. Pyar ko urjawan bana diya hai aapne. pyaar ke ahsaas se shareer mein phurphuri sa chootna, lajana, labon ka kaanpna, nazron ka milna aur sharmake larajna ek us komal pushp ka ahsaas dilata hai jo bhanwre ko apne upar pa kar apne aap mein simat jata hai.Shandar rachna!

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  14. बबनजी..सुंदर रचना है..इसी सौंदर्य की एक झलक..” गये श्याम रवि तनया के तट, हाथ लिये भौंरा चक डोरी..औंचक ही तंह राधा देखी..नील वसन फरिया कटि पहने..बेनी पीठ रुचिर झक्झोरी...सूर श्याम देखत ही रीझे...नैन से नैन मिले..परी ठगोरी.”.शायद सूरदासजी को समंदर का ख्याल न आया होगा..

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  15. बहुत उम्दा - प्यार का पहल बीज [इसकी खुशबु कुछ होती ही येसी है बबन जी]

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  16. गुजर गई थी सारी रात
    कापते लवों को रोकने में
    पहली बार
    थरथराया था मेरा शरीर
    पहली बार पढ़ा था मैंने
    किसी के आंखों की भाषा
    और शायद
    हमदोनो ने बो दिया था
    प्यार का पहला बीज ॥

    bahut khoobsurat abhivayakti

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  17. Bhai Baban Ji, maanbhavan rachana hai. Vastav me agar aakhen padh le pyar ki bhasha to pyar rupi bij ankurit hoga hi.
    Aap ne "प्यार का पहला बीज" ko bahut hi sundar tarike se prastut kiya hai.
    Ye panktiya...."गुजर गई थी सारी रात
    कापते लवों को रोकने में
    पहली बार
    थरथराया था मेरा शरीर
    पहली बार पढ़ा था मैंने
    किसी के आंखों की भाषा
    और शायद
    हमदोनो ने बो दिया था
    प्यार का पहला बीज ॥"
    Khuch jyada hi prabhavit karti hai... Aap ko bahut-bahut dhanyavaad, Jo aapne is humm sabhi tak pahuchaye. Humm umid hi nahi purn visvash karate hai ki bhavishya me bhi aap humme nirash nahi karenge....Ma Saraswati aap ki lekhani ko aur jayada shakti de.

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  18. bahut kuch yaad dila diya aapne..... pehli baar thartharaya tha mera sharir , pehli bar padha tah amine, kisi ki ankho ki bhasha.....
    bahut sundar hai sir....

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  19. गुजर गई थी सारी रात
    कापते लवों को रोकने में.....


    बहुत खूब.....बड़ी ही अच्छी रचना...

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  20. बहुत ही सुन्दर रचना भाई साहब

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  21. गुजर गई थी सारी रात
    कापते लवों को रोकने में.............
    ...
    बहुत खूब....

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  22. मन के भावों को शब्दों में उकेरने की कला का एक और प्रमाण

    बहुत अच्छी रचना है ! बधाई

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  23. वाह पाण्डेय जी आज ये वट वृक्ष हो चुका है! बहुत बधाईयां, सुन्दर प्रयास आपका! मन प्रसन्न हो गया एक एक कविता चन्द्रमा से मेल खाती मुक्ताफ़ल को झुठलाती ! बहुत सुन्दर!!

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  24. kya khoob likha ji aap ne

    dil garden-garden ho gaya janab....

    Thanks for प्यार का पहला बीज

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  25. आँखों में जो गहराई है, क्या थाह कभी मिल पाई है
    कितने इसमें डूबे उतराए , पर थाह नहीं मिल पाई है
    सागर से भी है गहरी इन आँखों में तुम डूब कर देखो

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  26. perhaps this poem is based on your personal experience... but it acts on everyone.. goodone/

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  27. हम्मम्मम बहुत कुछ कह दिया गया यहाँ तो....अब हम क्या कहें....!!

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  28. === not love but a sexy poem....
    everybody experience..it. it acts on everyone.. but every body do not tell.....

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  29. सही कहा आपने ... भाव तो सभी के दिल में होते है ..मगर लिखते बहुत खम ही हैं

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