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सोमवार, 29 नवंबर 2010

ईश्वर उवाच

कहाँ -कहाँ खोजोगे मुझे
मेरा कोई घर ठिकाना है क्या
व्यर्थ गवांते हो अपनी ऊर्जा //

क्या तुम समझते हो
थोडा सा होम
थोड़ी सी धूप
थोड़ी सी कपूर
घंटी का स्वर
और आरती गाकर
पा लोगे मुझे //

सुनो ॥
मेरे और तुम्हारे बीच की दुरी
गाडियों में लगे
दो पहियों के सामान है
दो समानांतर रेखाओ जैसे //

मगर मैंने पढ़ा है
ठोस ज्यामिति के सिद्धांत कहते है
अंनत पर मिलती है
दो समानांतर रेखाए //

राज की बात बता देता हूँ
अपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
झुरियो वाला चेहरा देखना
शायद ...
मैं तुम्हें वही मिल जाऊ //

20 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sahi kaha.....apne bude maa baap ko dekhna shayad main vahin kahin mil jayoon....

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  2. bahut aacha likha hai bhaiyaa .. hameash kee tarah ..aantim chand panktiyan .. seedhe dil me

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  3. बहुत ही मार्मिक, बहुत ही हृदय स्पर्शि !इस अमृत वानि के लिए हमारा सादर प्रणाम और आपको बहुत बहुत बधाई !

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  4. राज की बात बता देता हूँ
    अपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
    झुरियो वाला चेहरा देखना
    शायद ...
    मैं तुम्हें वही मिल जाऊ /

    गज़ब .....बहुत सुन्दर काश यह ईश्वर उवाच सब पढ़ और समझ सकें ..

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  5. बबन जी, बहुत सुन्दर बहुत मार्मिक, बहुत हृदय स्पर्शि !
    आपको बहुत बहुत बधाई !

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  6. Bahut sundar rachna hai Baban ji ,, ekdam sach ,,
    moko kahaan , dhoondhe re bande ,
    main to tere paas mein ........

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  7. .बहुत सुन्दर .....बबन भाई..


    राज की बात बता देता हूँ
    अपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
    झुरियो वाला चेहरा देखना
    शायद ...
    मैं तुम्हें वही मिल जाऊ //

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  8. राज की बात बता देता हूँ
    अपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
    झुरियो वाला चेहरा देखना
    शायद ...
    मैं तुम्हें वही मिल जाऊ //

    यही तो ज़िन्दगी का सच है जिसे सब जानकर भी अन्ज़ान बनते हैं और खुदा को मंदिरों मे ढूँढते हैं।

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  10. Thanks for sharing with such a beautiful composition with meaningful thoughts.

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  11. क्लाइमेक्स लाजवाब है
    वेद कुरआन की शिक्षा को ही जाने अनजाने आपने व्यक्त किया है ।

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  12. आदरणीय बबन सर..खुशनसीब हैं वे संताने जिन्हें माता-पिता का सानिध्य मिला..माता-पिता की सेवा ही सच्ची प्रभु-भक्ति है..माता-पिता के चरणों में स्वर्ग है..बदनसीब हैं वो जिनको न मिल सका अपने जन्मदाताओं का प्यार और दुलार.....मातरू देवो भवः ..पितृ देवो भवः

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  13. iswar ko kahan dundte ho ,ve to pratyek jibon me basta hai,

    "jibe prem kare jei jan sei jan sebitechhe iswar"
    -:"SWAMI VIVEKANANDA":-

    MAA,BABUJI TO SAKSHAT ISWAR KE RUP HAIN,inka aasirwad hamesa mathe par rahna chahiye

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