कहाँ -कहाँ खोजोगे मुझे
मेरा कोई घर ठिकाना है क्या
व्यर्थ गवांते हो अपनी ऊर्जा //
क्या तुम समझते हो
थोडा सा होम
थोड़ी सी धूप
थोड़ी सी कपूर
घंटी का स्वर
और आरती गाकर
पा लोगे मुझे //
सुनो ॥
मेरे और तुम्हारे बीच की दुरी
गाडियों में लगे
दो पहियों के सामान है
दो समानांतर रेखाओ जैसे //
मगर मैंने पढ़ा है
ठोस ज्यामिति के सिद्धांत कहते है
अंनत पर मिलती है
दो समानांतर रेखाए //
राज की बात बता देता हूँ
अपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
झुरियो वाला चेहरा देखना
शायद ...
मैं तुम्हें वही मिल जाऊ //
bahut sahi kaha.....apne bude maa baap ko dekhna shayad main vahin kahin mil jayoon....
जवाब देंहटाएंbahut aacha likha hai bhaiyaa .. hameash kee tarah ..aantim chand panktiyan .. seedhe dil me
जवाब देंहटाएंwah...
जवाब देंहटाएंhumko milta jeevan jinse
जवाब देंहटाएंwoh ghar hi ek mandir hai
बहुत ही मार्मिक, बहुत ही हृदय स्पर्शि !इस अमृत वानि के लिए हमारा सादर प्रणाम और आपको बहुत बहुत बधाई !
जवाब देंहटाएंBahut hi sundar aur satya .....
जवाब देंहटाएंराज की बात बता देता हूँ
जवाब देंहटाएंअपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
झुरियो वाला चेहरा देखना
शायद ...
मैं तुम्हें वही मिल जाऊ /
गज़ब .....बहुत सुन्दर काश यह ईश्वर उवाच सब पढ़ और समझ सकें ..
बबन जी, बहुत सुन्दर बहुत मार्मिक, बहुत हृदय स्पर्शि !
जवाब देंहटाएंआपको बहुत बहुत बधाई !
Bahut sundar rachna hai Baban ji ,, ekdam sach ,,
जवाब देंहटाएंmoko kahaan , dhoondhe re bande ,
main to tere paas mein ........
very good sir,
जवाब देंहटाएं.बहुत सुन्दर .....बबन भाई..
जवाब देंहटाएंराज की बात बता देता हूँ
अपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
झुरियो वाला चेहरा देखना
शायद ...
मैं तुम्हें वही मिल जाऊ //
राज की बात बता देता हूँ
जवाब देंहटाएंअपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
झुरियो वाला चेहरा देखना
शायद ...
मैं तुम्हें वही मिल जाऊ //
यही तो ज़िन्दगी का सच है जिसे सब जानकर भी अन्ज़ान बनते हैं और खुदा को मंदिरों मे ढूँढते हैं।
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जवाब देंहटाएंThanks for sharing with such a beautiful composition with meaningful thoughts.
जवाब देंहटाएंक्लाइमेक्स लाजवाब है
जवाब देंहटाएंवेद कुरआन की शिक्षा को ही जाने अनजाने आपने व्यक्त किया है ।
आदरणीय बबन सर..खुशनसीब हैं वे संताने जिन्हें माता-पिता का सानिध्य मिला..माता-पिता की सेवा ही सच्ची प्रभु-भक्ति है..माता-पिता के चरणों में स्वर्ग है..बदनसीब हैं वो जिनको न मिल सका अपने जन्मदाताओं का प्यार और दुलार.....मातरू देवो भवः ..पितृ देवो भवः
जवाब देंहटाएंsunder :)
जवाब देंहटाएंशुभ सन्देश!
जवाब देंहटाएंheart touching truth
जवाब देंहटाएंiswar ko kahan dundte ho ,ve to pratyek jibon me basta hai,
जवाब देंहटाएं"jibe prem kare jei jan sei jan sebitechhe iswar"
-:"SWAMI VIVEKANANDA":-
MAA,BABUJI TO SAKSHAT ISWAR KE RUP HAIN,inka aasirwad hamesa mathe par rahna chahiye