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शनिवार, 13 नवंबर 2010

अगर सजनी हो दिलदार


( "एक दिन मैं भी विक जाउंगा " कविता पर आये कमेंट्स के बाद मैं अपने निष्कर्ष पर पहुँच गया )

जैसे .......
पर्व -त्यौहार
बना देती है हमारी जिन्दगी
मजेदार

गरम -मशाले
बना देती है सब्जियां
खुशबूदार

खिड़कियाँ
बना देती है कमरे को
हवादार

ठीक वैसे ही
अगर बच्चे हो समझदार
और सजनी हो दिलदार
तो
सजन क्यों न बने
ईमानदार ॥

17 टिप्‍पणियां:

  1. बबन भाई, सुप्रभात,
    बहुत-बहुत स्वागत है आपकी इस रचना का, पुरुषों के व्यक्तित्व निर्धारण एवं विकास में नारी-शक्ति की ही मुख्य भूमिका है, चाहे वह माँ के रूप में हो या जीवन-साथी के रूप में. आपकी रचना पढ़कर अच्छा लगा. शेयर करने के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद.

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  2. Baban Bhai bahut sateek baat kahi hai aapne, agar bacche ho samjhdaar aur sajni ho dildaar to jeevan bane khushgwaar, aur iski vipreet paristhithi me jeevan bane badboodaar........kisi bhi ghar ko swarg aur narak tulya banane me ek grahni ka sabse bada yogdaan hai, vo chahe to sambhal le aur chahe to bigad de...........badhai.....

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  3. बबनजी,
    सजन-सजनी (नर-मादा) तो पशु में भी होते हैं, पर ईमानदारी नहीं एक दूसरे के प्रति... सिर्फ जड़ता...
    जीवन में ईमानदारी तो होनी ही चाहिए... या फिर मनुष्य या पशु में अंतर कहाँ...
    आपकी पैनी नज़र कहाँ कहाँ पहुँच जाती है...!!! और लेखनी भी पीछे नहीं रहती...!!!

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  4. बबन जी अच्छी अर्थपूर्ण कविता...........पर बन्दूक दूसरे के कंधे पर रखकर हि क्यों चलाना.........कि......... साजन ईमानदार तभी बने जब सजनी हो दिलदार और बच्चे हो समझदार........

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  5. bahut khoob,sajani agar didar ho to hum bhi dildar rahenge.Phir sajani se hum kya chupayenge?

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  6. Bhai Baban ji, Atisundar rachana hai. aap ke sare udaharan satik hai. Agar sabhi ke jiwan me aisa hi ho jay to jiwan sarthk ho jayega.

    bahut hi achhi rachana...gyanvardhak rachhana...
    Hardik dhanyavaad.

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  7. Baban ji suprabhat!Sajan aur sajni ke sambandhon ki samvednaon ko alag alag udahran prastut kar aapne ek doosre ke prati wafadar rahne ki bhavna ko darshaya hai! Bahut khoob!

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  8. जी अनिल भाई ...बिना दोनों के understanding के काम नहीं चलने वाला .....सामंजस्य का नया -नया उदहारण देने की कोसिस की है

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  9. बबन भाई साहिब ..........सच दर्शाती हुई आप की एक और रचना ..........पहले भी एक बार इस पर कमेन्ट पोस्ट करने की कोशिश की थी .......पत्नी की समझदारी बहुत जरूरी है मौसम खुशगवार रखने के लिए ...सोलह आने सच ...........पर उम्मीद दोनों से ही होती है एक-दूजे को .........

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  10. ji baban ji aap to bade maje ke mood me aa gaye hai kya baat hai

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