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सोमवार, 1 नवंबर 2010

भाषण

भाषण .....
मैं बोलूंगा
आप सुनेगे
मैं मंच पर रहूंगा
आपसे आखें चार जो करनी है ॥

आयोजकों ने दिया है
एक खास विषय
आप सभी आये है
खास विषय पर सुनने ॥

मगर ....
मैं लोकतंत्र का नेता हूँ
कुछ भी बोलूंगा
आपको सुनना होगा
अपनी सरकार की बड़ाई
और विपक्ष की धुलाई
बीच में टोकने का मतलब
मेरी बेईज्जती ॥

नेता का भाषण
हसुआ के विवाह में
खुरपा का गीत ॥

12 टिप्‍पणियां:

  1. Baban bhaiya, Yah neta ka bhashan na hua ki kisi saahukar ki ghulami ho gayee, ki karni hi padegi!
    netaon mein khud to koi kabiliyat hoti nahin hai, likha likhaya bhashan padh kar jhooti dilasaaon ki door se logon ko baandh dete hain aur ashwasano ki ladi se janta ka ullu banate hain!
    Kya bolna hai, kisko ingit karna hai, yeh neta ko nahin pata! woh to begani shadi mein abdullah deewana jaise lagte hain! Wah re neta-kaise bhrashtachar ki naav kheta!

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  2. badhiya likha hai !
    netaji ke bhasan ki tulna hetu acchi upma chuni hai....
    हसुआ के विवाह में
    खुरपा का गीत
    regards,

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  3. hahahaha ...achchha end kiya hai kavita ka ....
    aur netaon ki aadat par achchha vyangya hai ...
    thanks Baban ji .

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  4. कहते हैं कि नेता बनने के लिए पढने-लिखने की आवश्यकता नहीं ! डिग्री लेने की भी जरूरत नहीं ! अपने जीवन का बहुमूल्य समय स्कूल-कालेज की पढाई में नष्ट करने के लिए आप बाध्य नहीं ! हां आपको एक लम्बा-चौडा लैक्चर झाडना जरूर आना चाहिए ! फिर यदि किस्मत ने साथ दिया तो नेतागिरी सदैव आपके कमल चरणों में स्थान पाने के लिए व्याकुल रहेगी ! हमने तो ऐसे-ऐसे भी नेता देखे हैं जो अंगूठा लगाना भी नहीं जानते, जिन्हे संसार की गति का भी ज्ञान नहीं, और तो और अपना भाषण भी वो अपने निजि सचिव से तैयार करवाते हैं ! बलिहारी है ऐसे नेता जी की !

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  5. babban ji aap dwara ye rachna likhne ke liye dhanyawad. Neta aur unke bhaashan ne hi desh ka satyanash kar diya hai,

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  6. नेता का भाषण
    हसुआ के विवाह में
    खुरपा का गीत .............bilkul sahi kataksh kiya hai aapne baban bhai ......ati sundar

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  7. बब्बन भईया

    धन्यवाद के साथ शुरुवात करना चाहुंगा की आपने लोकोक्ति को अपनी रचना मे तरजीह दी है ।

    नेता स्थिति + परिस्थिति का दास होता है और उसे हंसुआ और खुरपी के साथ साथ कुदारी , टांगी आदि का ख्याल रखना होता है इसलिये उसे सब गीत गाने पडते है ।

    :-) चुनाव से आ रहा हुँ कई विधानसभा और फिर पंचायत के चुनाव मे कई जगह गया बस उसी को कह रहा हुँ ।

    आपकी रचना हमेशा जानदार रहती है और एक सही सन्देश देती है । और यह रचना दो कदम आगे है नेता लोगो को परिभाषित करने मे ।

    बधाई

    आज कल के नेता ->

    जे जनता के आपस में लड़वावे ला
    धर्म जाती के नाम पे भड़कावे ला
    क्षेत्र के नाम पे लोगन के बहकावे ला
    घोटाला से आपन नाम बनावे ला
    स्विस बैंक में पैसा जमा करावे ला
    नेता जे चुनाव के समय हाथ जोड़े ला
    चुनाव के बाद जनता के हाथ तोडे ला
    नेता जे के मतलब नईखे इंसान से
    जेकरा हमेशा काम चले ला शैतान ( चमचा ) से
    नेता जे के जरुरत बाटे जनता के वोट से
    जे के मुहब्बत बाटे खाली बड़े बड़े नोट से
    बस हमरा नजर में आज कल के नेता के एहे रूप बा
    आ रउवा सोच सकेनी की अइसन नेता से देश के का स्वरुप बा
    +++++++++++++++++++++
    ता आगे आई अब एह नेतागिरी के तोडी
    कर्णधार बनी आ देश के इक सूत्र में जोड़ी
    +++++++++++++++++++++

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  8. बबन जी वे नेता हैं, कुछ भी बोल सकते हैं, बोलने दीजिये......सोचने की शक्ति तो अपनी निजी है.....:-)

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  9. बबनजी,
    अबतो इन्होंने छबी ही ऐसी बना दी है कि नेताविहीन देश या समाज ही कल्पना से परे है...

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  10. " ........मैं लोकतंत्र का नेता हूँ
    कुछ भी बोलूंगा
    आपको सुनना होगा........ "
    यह एक सामान्य अनुभव है कि हमारे देश में प्रजातंत्र के प्रयोग के दौरान कतिपय विसंगतियां पैदा हो गयी हैं|यह भी स्पष्ट ही है कि उनके खात्मे की दिशा में सबसे ज्यादा प्रभावशाली क़दम लोगों में जागृति ही हो सकती है|आपकी यह कविता उस जागृति के लिए सही जगह चोट करती है!

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