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गुरुवार, 11 नवंबर 2010

विटामिन की गोलियाँ

आज नहीं रुक रही थी
फाईल पर उनकी कलम
नहीं खोज रही थी
उनकी आंखें
सेल्फ पर रखे
सरकारी नियमो की किताब
पैर में मानों
लग गए हों पहिये ॥

मैंने भी खाई है
विटामिन की गोलियाँ
मगर उसमे नहीं होती
नोटों की गद्दियों जैसी ऊर्जा ॥

25 टिप्‍पणियां:

  1. written nicely on the concept of money being the energising driving force!
    shubhkamnayen!

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  2. मैंने भी खाई है
    विटामिन की गोलियाँ
    मगर उसमे नहीं होती
    नोटों की गद्दियों जैसी ऊर्जा ॥

    पंक्तियों ने बेहद प्रभावित किया.........सुन्दर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें !!

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  3. सहि लिखा है आपने भाई साहब पैसों मे इतनी उर्जा होती है कि महिनों का काम मिन्टो् मे करवा देता है! पर मुझे लगता है ये पैसे फलते नहिं हैं! एसे रिस्वतखोरों/या गलत तरीके से कमाए गए पैसे वालों के जीवन मे कभी भी शाँति नहि मिलती है. इनके बच्चे अक्सर अपाहिज देखे गए हैं, कदाचित वो खुद भी किसी लाईलाज बीमारी के शिकार होते हैं!

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  4. भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए बधाई

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  5. Jab noton ki khuraak andar jaati hai,
    Shareer ko urjawaan bana jaati hai,
    Sarkaari niyamo ki uda dhajjiyan,
    Woh khud niyam kahlaati hain!

    Wakai bhrast tantra mein yahi vitamin rah gaya hai! Sthiti bhayawah hai! Bahut hi khoobsoorat andaaz mein chand panktiyon mein aapne aaj ke tantra par karari chot ki hai! Keep it up!

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  6. बड़े भाई नमस्कार,
    आपकी लेखनी को शत-शत प्रणाम.
    आपकी रचना यथार्थपरक एवं लाजवाब है.

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  7. नोटों कि गड्डियों जैसी उर्जा ....बहुत सही ...

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  8. सच कहा है तरीके से कहा है,करीने से चोट की है। अभियान्त्रिकी की पढाई का सदुपयोग किया है।

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  9. क्या बात है बबन भाई..भ्रष्ट व्यवहार पर बहुत सटीक व्यंगात्मक रचना....शुभकामनाएँ...आपकी यह लेखनी ऐसी ही तीक्षण रहे...

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  10. Baban Bhai....Bahut Khub...aaj ke rsihwatkhori ke munh par zabardast tamacha....kya kehne...LEKE RISHWAT PHANS GAYA HAI / DE KE RISHWAT CHOOT JA....

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  11. बबन जी, विटामिन की गोलियों में वाकई नोटों की गद्दी वाली उर्जा नहीं होती . सही लिखा आपने पंख लग जाते हैं सब रुके हुए कामों के, जैसे ही "यह" उर्जावान गोलियां अफसर के पास जाती हैं. बधाई.......

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  12. बहुत ही बढ़िया कटाक्ष है बब्बन जी आपकी प्यारी सी,नन्ही
    सी कविता में.आज की व्यवस्था पर जो नोटों के गोल पहियों
    बगैर नहीं चलती...और हाँ विटामिन की गोलियों में वह नशा
    वह उर्जा कहाँ जो हरे-हरे या लाल-पीले नोटों में है??
    बहुत धन्यवाद सार्थक कविता के लिए.

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  13. This is Vitamin M..which you have never taken baban ji ..perhaps it won't suit you...but if the office cleark will not take this vitamin he will become too feeble to proceed any file
    Beemar hain yaar..marne do be imanon ko

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  14. BHAI YE SABH KIYO HO RAHA HAI YE MAHTAWAAPURAN NAHI HAI BALKI ISH KO KAISE ROKA JAYE JAYADA MAHTAWAPURAN HAI SO MERA EK SUJHAV HAI KI HAME HER SARKAR KARALYA KO ON LINE KAR DENA CHAHOYE OR PHIR HER ROZANA KI VIDIO RECORD BHI RAHNA CHAHIYE , PHIR AAP YAKIN MANIYE DESH MAI BRASTACHAR PER 8O%ANKUSH LAG JAYEGA KIYOKI JISKA KAAM KIYO NAHI HO RAHA HAI USKI RECORDING HOGI OR SAHI OR GALAT SIKAYAT KA BHI PATA CHALEGA OR RISWAT DENE OR LENE KI BHI RECORDING HOGI OR KARMCHARI BHI TIME PER OFFICE MAI BETHENGE OR JIMEWARI SE KAAM KARNE KO MAJBOOR HO JAYENGE ......SAYAD AISA JALDI SE HO ....

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  15. वाह! बेहतरीन रचना... एकदम अलग, लेकिन एकदम सटीक!

    प्रेमरस.कॉम

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  16. बबन जी अच्छा कटाक्ष हैं.........नोटों कि गद्दी लगा कर तो सालो के काम चुटकियो में हो जाते हैं......विटामिन कि गोली से ऐसा होने लगता तो....लोग नोटों की गद्दियो की जगह विटामिन कि गोली हि नहीं खाने लगते......

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  17. सही कहा पाण्डेय जी इस नोटों की गड्डियों में बरा बिटामिन है आज इस कलयुग में ....क्योकि सामाजिक वातावरण ऐसा कर दिया है प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे सम्माननीय पदों पर बैठे निकम्मों ने की इस बिटामिन के आगे सद्चरित्र,सत्य,न्याय और ईमानदारी की सभी बिटामिन फेल है......शर्मनाक स्थिति है ,इंसान जी नहीं सकता इस देश में.....

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  18. मैंने भी खाई है
    विटामिन की गोलियाँ
    मगर उसमे नहीं होती
    नोटों की गद्दियों जैसी ऊर्जा ॥
    बेहद तीखा और सटीक व्यंग्य्।

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  19. विटामिन की गोलियाँ और नोटों की गद्दियों....बड़ा ख़ूबसूरत ताल मेल....है ये ....बड़ी ही ख़ूबसूरत पंक्तिया....

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    1. मैंने भी खाई है
      विटामिन की गोलियाँ
      मगर उसमे नहीं होती
      नोटों की गद्दियों जैसी ऊर्जा //
      WAAH SIR JEE

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