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शनिवार, 27 नवंबर 2010

मैं अब आवाज दूंगा

कब तक दौड़ता रहूंगा
राह काटने वाली बिल्ली के पीछे
अंधविश्वाशो की किताब
मैं अब जला दूंगा //

क्यों नहीं सूखेगे गरीब के आंसू
गरीबों के खून से बनी सोने की लंका
हनुमान बन
मैं अब जला दूंगा //

खड़े होकर खाली खेत नहीं देखूगा
भूख से सोये बच्चों को पेट भरने के लिए
किसान बन
मैं अब जगा दूंगा //

तेरा पढना भी क्या पढना यारो
जो गर की काम ना आये
बेजुवानो की जुबान बन
मैं अब आवाज दूंगा //

13 टिप्‍पणियां:

  1. कब तक दौड़ता रहूंगा
    राह काटने वाली बिल्ली के पीछे
    अंधविश्वाशो की किताब
    मैं अब जला दूंगा /
    आत्मविश्वास को दर्शाती हुई रचना यही तो चाहिए ,बधाई

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  2. बहुतै अच्छा लिखे हैं भैया जी ....
    १०८ साल तक स्वस्थ-परसन्न रहते अईसा ही लिखते रहिये......
    आपके ही संजीव गौतम

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  3. बहुत उम्दा बबन जी-मै अब आवाज़ दूंगा

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  4. बहुत सुन्दर एवं सार्थक विचार से पूर्ण रचना!
    आभार!

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  5. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (29/11/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  6. बबन जी.........बहुत बढिया.......अन्धविश्वास और किसानो की समस्याए जो हमारे.पिछड़े वर्ग को मिटाने पर तुली हुई है........उसके लिए अब जिनके पास आवाज है जिन्हें इन समस्याओ के बारे में पता है........और असरदार तरीके से अपनी बात रख सकते है........उन्हें अब अपनी आवाज़ उठानी चाहिए...खुकी आँखों से सोये समाज को जगाने का अच्छा प्रयास आपका बबन जी ...बहुत खूब.....

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  7. बबन जी बेहद उम्दा रचना और आपके विचार प्रतिबिंबित करती हुई....शुभकामनाएँ...

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  8. bahoot hi achchhi rachna prerna deti hui. hame ab aawaj dekar jagane aur khud bhi jagne ki jaroorat hai. hameN internet se nikalkar jamiN par bhi aage aana hoga.

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  9. बहुत सुन्दर आशावादी और कर्म का सन्देश देती कविता ...

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  10. बेजुवानो की जुबान बन
    मैं अब आवाज दूंगा //

    सार्थक सन्देश देती कविता.

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