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सोमवार, 8 नवंबर 2010

हँसी का फौआरा


फैशन शो में धक्के से
मैडम गिरी उच्चके से
हाई -हिल की टूट गई कील
होने लगा बहुत बैड फिल ॥
गिरा रैम्प पर बैग उछलकर
बोल पड़े सब .....
चलिए संभलकर ॥
हाई हिल की सैंडल पहन
अब ना चलिएगा दुबारा
नहीं तो आप बनती रहेगी
हँसी का फौआरा ॥

20 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह .. अपने तरीके का वार्डरोब मैल्फंक्सन है ये भी

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  2. इस सुन्‍दर रचना के लिए बधाई, बबन पांडे जी

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  3. हा हा हा हा हा हा जय हो जय हो !

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  4. ramp pe chalna bhi sabke bas ka nahi ,ha ha ha ,bahut khoob babban bhai

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  5. हास्य व्यंग का एक अच्छा और बढ़िया प्रयास है बबन जी........
    अगर कोई अपना काम ठीक से नहीं कर पाता तो वो हमेशा हंसी का पात्र बनेगा .....तो आप लोगो को हँसाने का काम भी जारी रखिये....

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  6. रैम्प पर चलने से याद आया कि जिंदगी कि कहानी भी कुछ इसी तरह से है..इंसान को अपनी जिंदगी में हज़ारों दिक्कतें आती है, कितनी बार वह गिर गिर कर संभालता है..ये हील तो एक बार के लिए ठीक भी हो जायेगी पर हमारे जीवन कि हील एक बार टूट गए तो फिर कभी ठीक न होगी..अंत में यही कहना चाहूँगा कि ये कविता एक बहुत हे उच्च कोटि कि हास्य व्यंग है...बहुत हे बढ़िया अंदाज़ में आपने अपनी बात को हम सब तक पहुँचाया..

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  7. हा हा हा………………बहुत खूब्।

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  8. Waah...waah... Bhai Baban Ji, Bahut khub aap ka to koyi jabab hi nahi. Bahut hi sarahaniy Hasya vyang rachana.
    Dhanyavaad.

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  9. ek aur dikash rachna---------thoda hat ke bt nice view on the present scenario,,,

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