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गुरुवार, 4 नवंबर 2010

जागते रहो

समय ......
एक ऐसी गाडी है
जिसमे ब्रेक नहीं होता
एसिलेटर और क्लच भी नहीं
अपनी गैराज में
बंद नहीं कर सकते आप ॥

हमें चलना है
इसी गाडी के साथ -साथ
कैसे चलेगे हम
सिर्फ ....एक ही उपाय है
जागते रहो
और देखते रहो लक्ष्य को
क्योकि
जो सोया ,सो खोया
जो जागा ,सो पाया ॥

8 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल सही कह रहे हैं।
    दीप पर्व की हार्दिक बधाई।

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  2. जिन्दगी है रेल कोई पास कोई फेल!बहुत सुन्दर बधाई हो!

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  3. Baban ji, sahi kaha aapne.....insaan dheere dheere sab cheezon par apna control paane mein samarth ho gaya hai......parantu samay ka pahiya jo hai....wo chalta hi jaata hai....kisi ki muthi mein band nahin hai....

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  4. बहुत खूब कहा बबन जी आपने... जागना है और चलना है.... बस यूँ समझ लें... "सावधानी हटी दुर्घटना घटी...!!" :)))

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  5. सिर्फ ....एक ही उपाय है
    जागते रहो
    और देखते रहो लक्ष्य को
    क्योकि

    बहुत सटीक ....

    दीपावली की शुभकामनाएं

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  6. बबन जी सही कहा.............अगर इस दुनिया में कुछ पाना है तो जागना ही होगा........आज जो हम लोग खुली आँखों से सो रहे है हम सबको अब जागने कि जरूरत हैं........

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  7. सराहनीय लेखन........
    +++++++++++++++++++
    चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
    मंगलमय हो आपके, हेतु ज्योति का पर्व॥
    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

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  8. वाकई समय बड़ा बलवान है ............................और बलवान का इंतजार ..तो आप को जाग कर ही करना पड़ेगा ...........वर्ना.... '' वो आपको खा जायेगा .............

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