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रविवार, 19 जनवरी 2014

प्लास्टिक के फूल

बातों का जहर ...
उगलती है ...
सास-बहू
हम और आप
सत्ता दल विपक्षी  नेताओ पर //

मगर हम जो जहर छोड़ रहे है
फूलों पर ...
उसे चूस
मर रही  है मधुमक्खियां ..
मर रही हैं तितलियाँ भी ..
फूलों का गंध भी  बारूदी  लगता है //

मेरे दोस्त !
नाराज मत होना ...
जब मैं तुम्हें अब
प्लास्टिक के फूल
स्वागत में दू   तो ...
  

10 टिप्‍पणियां:

  1. आभार पूजा पाण्डेय ..हौसला आफ़ज़ाई करते रहे

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  2. कुछ दिनों में प्लास्टिक के फूलों से ही स्वागत होगा...एक ही फूल को बार-बार कई लोगों को दिया जा सकेगा...बढ़िया लिखा है आपने...

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    1. कीट नाशक दवाओ के कारण फूलों को चूसने के क्रम में
      तितलियाँ और मधुमक्खियां मर रही है //

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  3. गहरी बात कह दी चंद पंक्तियों में ... लाजवाब रचना ...

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  4. कल 23/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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