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शनिवार, 2 जुलाई 2011

मैं क्या करूँ

राह में हैं कटीले कंकड़ ,तो क्या चलना बंद कर दूँ
ख़बरें छपी है फरेब की ,तो क्या पढना बंद कर दूँ ....//

मैं झूठ का तड़का नहीं लगाता, सच की दाल में
उन्हें बुरा लगता है ,तो क्या लिखना बंद कर दूँ ...//

सारी दुनिया पीछे पड़ी है,सच का गला दबाने में
नहीं मरता सच , तो क्या मैं उसे नज़रबंद कर दूँ ॥//

तुफानो से टकराने में भला किश्ती,कब डरा करती है
पडोसी सुनते हैं मेरी बात ,तो क्या मैं खिड़की बंद कर दूँ ...//

30 टिप्‍पणियां:

  1. सारी दुनिया पीछे पड़ी है,सच का गला दबाने में
    नहीं मरता सच , तो क्या मैं उसे नज़रबंद कर दूँ ॥//

    सच तो कभी नज़रबंद हो ही नहीं सकता .. अच्छी प्रस्तुति

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  2. दिल-दिमाग के खुलें सब खिड़की-दरवाजे.

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  3. किसी को खराब लगे तो कोई लिखना थोड़े ही बंद कर देगा...
    न ही सच को नजरबंद किया जा सकता....
    बहुत बढ़िया...

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  4. ख्यालात में बगावत है जो कि परिवर्तन के लिए बहुत ज़रूरी है
    बहुत सुंदर प्रस्तुति है उस बगावत की......आप को बधाई

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  5. आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके पोस्ट की है हलचल...जानिये आपका कौन सा पुराना या नया पोस्ट कल होगा यहाँ...........
    नयी पुरानी हलचल

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  6. राह में हैं कटीले कंकड़ ,तो क्या चलना बंद कर दूँ
    ख़बरें छपी है फरेब की ,तो क्या पढना बंद कर दूँ ....//

    bahut achhi pantiya

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  7. Bilkul na band karein koyi bhi wo kam,
    jis se man ko mile chain aur aaraam..
    agar sochna band kar dein ghabra kar ham sab,
    to zindgi ki gaari ko lag jaaye poorn viraam.

    Bahut achha likha aapne...sadhuvaad

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  8. प्रत्येक लाइन एक हौसला देती, जीने की कला सिखाती। "सबसे बडा रोग क्या कहेंगे लोग"। राह में कंकड भी मिलेगे ,फरेब की खबरें भी छपेगी मगर सहन करते हुये आगे बढना "सच नहीं मरता" का प्रयोग उचित स्थान पर किया गया है। यह भी ठीक लिखा है कि यदि कोई अपनी बात सुन रहा हो तो क्या खिडकी बन्द की दी जाये। उत्तम रचना
    लेकिन दौनों में झगडा होरहा हो तो खिडकी बन्द कर ही देना चाहिये ताकि पडौसी उस झगडे का आनंद न ले सके या फिर इशारों में ही लडना चाहिये ।

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  9. मैं झूठ का तड़का नहीं लगाता, सच की दाल में
    उन्हें बुरा लगता है ,तो क्या लिखना बंद कर दूँ ...//

    हौसला बुलंद करती जोश से भरी बहुत सुन्दर रचना..... बेहतरीन प्रस्तुति

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  10. तुफानो से टकराने में भला किश्ती,कब डरा करती है
    पडोसी सुनते हैं मेरी बात ,तो क्या मैं खिड़की बंद कर दूँ ...//

    हर पंक्ति लाज़वाब...सार्थक सन्देश देती सुन्दर रचना..

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  11. नज़्म के लिहाज से...गज़ब के भाव और बहुत सुन्दर...

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  12. अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  13. मैं झूठ का तड़का नहीं लगाता, सच की दाल में
    उन्हें बुरा लगता है ,तो क्या लिखना बंद कर दूँ
    सारी दुनिया पीछे पड़ी है,सच का गला दबाने में
    नहीं मरता सच , तो क्या मैं उसे नज़रबंद कर दूँ


    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

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  14. वाह! क्या बात है बब्बन भाई.
    गजब का लिखते हैं आप
    अजब से प्रश्न करके.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

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  15. padhna band kar denge to fereb badh jayega
    likhna band kar denge to jhuth sar chad jayega
    sach ko najarband kar denge to ladai ruk jayegi
    khidki band kar denge to saans ruk jayegi

    apna kuch band mata kariye
    bas dil kholnein hai yaad rakhiye

    utkrish kriti per hardik badhayi

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  16. ख़बरें छपी है फरेब की ,तो क्या पढना बंद कर दूँ ....//

    g nahi padhna band mat kariye khoob padho

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  17. हिंदी भाषा के प्रोत्साहन के लिए इस ब्लॉग को बढ़ावा दे तथा इस लिंक पर क्लिक कर इस ब्लॉग को फोल्लो करे ! http://ajaychavda.blogspot.com/

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  18. bahut kub
    mare blog pe aane ke leye savagth hai
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  19. sundar

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  20. भिक्षाटन करता फिरे, परहित चर्चाकार |
    इक रचना पाई इधर, धन्य हुआ आभार ||

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  21. aapke blog par pahli baar charcha manch ke madhyam se aai hoon aana sarthak raha ek damdaar kavita padhne ko mili.maja aa gaya padh kar.MAIN KYA KARUN...bahut achchi kavita.mere blog par sadar aamantrit hain.

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  22. रचना चर्चा मंच पर है आज ||

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  23. बब्बन जी ...क्या लाजवाब काव्य-प्रश्नावली है.
    मैं कहता हूँ कि ...
    "जहाँ इतनी खूबसूरत प्रस्तुति हो
    तो कैसे बांचना बंद कर दूं"

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