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मंगलवार, 3 जनवरी 2012

अपनापन


तुमको मचलते हुए क्या देखा
मैंने एक इन्द्रधनुषी तितली देख ली //

तुमको हस्ते हुए क्या सुना
मैंने बर्फ के ढके पत्तों से
गुजरते हवा का संगीत सुन लिया //

तुम्हारे अधरों को क्या चूमा
मधु से भरे दो छत्ते मिल गए //

तुम्हारे कपोलों पर
पसीने की कुछ बूंदें थी
मुझे लगा .....
कमल के पत्तों पर
ओस की कुछ बूंदें फिसलने से रह गई //

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत सुन्दर....धन्यवाद|

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  2. वाह!!!!!आपका अपनापन अच्छा लगा,...सुंदर पोस्ट,....

    "काव्यान्जलि":

    नही सुरक्षित है अस्मत, घरके अंदर हो या बाहर
    अब फ़रियाद करे किससे,अपनों को भक्षक पाकर,

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  3. तुमको हस्ते हुए क्या सुना
    मैंने बर्फ के ढके पत्तों से
    गुजरते हवा का संगीत सुन लिया //
    ...sarsarti hawa ke jhonke see sundar krati...

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  4. बहुत ही सुन्दर और रोचक वर्णन किये हैं .. नव वर्ष की ढेर साडी बधाइयाँ |

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  5. तुम्हारे अधरों को क्या चूमा
    मधु से भरे दो छत्ते मिल गए //
    WHAT A BEAUTIFUL EXPLANATION .

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  6. कमल के पत्तों पर
    ओस की कुछ बूंदें फिसलने से रह गई //

    खुबसुरत पंक्तियाँ ....

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