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गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

प्रेम-याचना


जयेष्ट की गर्मी
और आग के दहकते शोलों को
महसूस किया है मैंने //

अब मैं ...
तुम्हारे दहकते सुर्ख अधरों
निस्वच्छ श्वासों
उन्नत,सुकोमल,मस्त उरोजों
और तुम्हारे तपतपाते तन की गर्मी में
झुलसना चाहता हूँ //

मुझे पता है ....
ऐसा करने से मेरे संताप
छू-मंतर हो जायेंगें
क्या ऐसा होगा प्रिय !!

19 टिप्‍पणियां:

  1. भाई जी आप हमेशा ही इतने हॉट रहते हो क्या ? :)

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  2. और तुम्हारे तपतपाते तन की गर्मी में
    झुलसना चाहता हूँ //

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  3. जरूर होगा बबन जी
    बस आप ऐसे लिखते भर रहिये,....
    सुंदर उतेजक पोस्ट ,...

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!चर्चा मंच में शामिल होकर चर्चा को समृद्ध बनाएं....

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  5. आप की रचना बड़ी अच्छी लगी और दिल को छु गई
    इतनी सुन्दर रचनाये मैं बड़ी देर से आया हु आपका ब्लॉग पे पहली बार आया हु तो अफ़सोस भी होता है की आपका ब्लॉग पहले क्यों नहीं मिला मुझे बस असे ही लिखते रहिये आपको बहुत बहुत शुभकामनाये
    आप से निवेदन है की आप मेरे ब्लॉग का भी हिस्सा बने और अपने विचारो से अवगत करवाए
    धन्यवाद्
    दिनेश पारीक
    http://dineshpareek19.blogspot.com/
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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  6. मुझे पता है ....
    ऐसा करने से मेरे संताप
    छू-मंतर हो जायेंगें
    क्या ऐसा होगा प्रिय !! ....waah

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  7. jindagi santapon se bhari hai..aisa karke to dekhiye..ek taraf to aap kahte hain santaap mit jaayenge..matlab aapko iska anubhav hai..phir aap prashna bhee kar rahe hain..yadi anubhav nahi hai to matlab hai aap aasha aaur hatasha ke beech jhool rahe hain...lekin log kahte hain iske liye official permit..matlab shaadi saamajik roop se jaruri hai..aaur ye bhee kahte hain kee shadi wo laddu hai jo khaye wo pachtayee jo na khayee wo bhi pachtayee..matlab santap khatam kabhi bhi nahi ho sakte

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  8. आपका पोस्ट मन को प्रभावित करने में सार्थक रहा । बहुत अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट ' आरसी प्रसाद सिंह ' पर आकर मेरा मनोबल बढ़ाएं । धन्यवाद ।

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  9. Very good post. If there were more authors like you I’d have more sites to check out when I do go online. Haha

    From Great talent

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  10. बबन जी आप तो ऐसे न थे .............? ,

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  11. सनसनाती कविता , मजा आ गया , ऐसे ही लिखते रहे .

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  12. सनसनाती कविता , मजा आ गया , ऐसे ही लिखते रहे .

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  13. wah, Babbanji,pahli bar padh raha hoo.kante ka likhte hai aap to. lagey raho padhne dad dene ke liye hum hai

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  14. 'फुर्सत' से ही बनती हैं 'सनसनाती ' कवितायें .. सुन्दर..

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