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मंगलवार, 29 नवंबर 2011

तुमसे है दुनियाँ


खुशियों की बौछार तुम्हीं हो
उदासी की तलवार तुम्हीं हो
तुम्हीं हो मेरी गंगा -यमुना
हर मौसम का प्यार तुम्ही हो //

तुम प्रकृति के दिलकश नजारे
तुम नभ के हो चाँद-सितारे
तुम्हीं हो मेरी फूल और खुशबू
मुदित मन का आधार तुम्हीं हो //

12 टिप्‍पणियां:

  1. पाण्डेय जी,
    आपकी रचना मुझे कुछ अधूरी सी लगी,
    थोडा और निखार लाए,...

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  2. सुन्दर प्रस्तुति, सुन्दर भाव , बधाई.

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  3. छोटी रचना मगर बेहद खूबसूरत !

    मेरी नई कविता "अनदेखे ख्वाब"

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  4. अपने चर्चा मंच पर, कुछ लिंकों की धूम।
    अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।।

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  5. नए शब्दों से परिचय हुआ ....
    सुंदर रचना रची है आपने...

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