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शनिवार, 26 नवंबर 2011

मुझे काली बीबी नहीं चाहिए


पंडित ने कहा
आप पर शनि की साढ़े सती है
काले घोड़े की नाल की अंगूठी पहने
वास्तु दोष है
काला कुत्ता घर में रखे
काली गाय को रोटी खिलाएं //

साधक ने कहा
मुझे तंत्र-मन्त्र करना है
काली बिल्ली चाहिए //

"माँ काली " भी तो काली ही हैं
और शंकर जी और कृष्ण जी भी
पर मैं ....
काली बीबी क्यों लाऊ //

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहोत सुन्दर कविता कु प्रथा पर अच्छा आघात | यह सवाल मेरे मन में बचपन से है के यहाँ पर शांति या अनुष्ठान करसे के लाखो मिल दूर ग्रह कैसे शांत हो जाएगा
    कविता बहोत ही बेहतरीन है | हार्दिक अभिनन्दन

    जय श्रीराम

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  2. kaya bat kahi hai babben bhai admi ki khwaishe rookti hi nahi hai

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  3. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

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  4. बहुत ख़ूबसूरत पोस्ट, बधाई.

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  5. बबन जी,..
    अन्धविश्वाश पर व्यंग करती सुंदर रचना,...

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  6. सटीक व्यंग्य ,लेकिन कुछ पंक्तियाँ और बढाई जा सकतीं थीं ।

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  7. खूबसूरत,अच्छी प्रस्तुति.........!!

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