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गुरुवार, 17 मार्च 2011

फिर जी भर कर खेलो होली //

लाज, शर्म और हया की
आज उठा दो डोली
फिर जी भर कर खेलो होली //

खाकर पुआ और दहीबाड़ा
निकली बच्चों की टोली
लिए रंग-बिरंगी पिचकारी
और गुलाल की पोटली //
लाज, शर्म और हया की
आज उठा दो डोली
फिर जी भर कर खेलो होली //

जीजा के घर आई साली
देवर, भाभी संग करे ठिठोली
सरहज के पीछे भागे नंदोई
लिए रंग से भारी हथेली //
लाज, शर्म और हया की
आज उठा दो डोली
फिर जी भर कर खेलो होली //

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया.

    आपको होली की सपरिवार हार्दिक शुभ कामनाएं!

    सादर

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  2. बड़ा मज़ेदार दृश्य खींचा है होली का।

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  3. बहुत सुन्दर रचना.. मीठे मीठे पुऐ याद आ गए..
    होली की सपरिवार शुभकामनायें........

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...होली की हार्दिक शुभकामनायें !

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  5. होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

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  6. सुन्दर प्रस्तुति...होली की हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं

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