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शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

कविता के बीज

आओ खोजते है ...
कविता के बीज 

ख़ुशी के अश्क 
या फिर गरीब के आँखों में खून 
आदमी से आदमी  के लड़ने का जूनून 
खोजिये 
यही कही पर मिल जायेंगे 
कविता के बीज//

धर्म बदलने की दुकान पर जाए 
कसम खाकर पलट जाने वालों के आँखों में झांके 
सिंदूर लगे पत्थर में खोजें 
मिल जायेगे 
कविता के बीज //

सास-बहु की खटपट में खोजे
देवर-भाभी के चुम्बन में खोजे 
नेताओ के चाल-चलन में खोजें 
मिल जायेंगे 
कविता के बीज //

5 टिप्‍पणियां:

  1. धर्म बदलने की दुकान पर जाए
    कसम खाकर पलट जाने वालों के आँखों में झांके
    सिंदूर लगे पत्थर में खोजें
    मिल जायेगे
    कविता के बीज //

    मन में भाव और विचारों की जरूरत है कविता के बीज हर जगह मिल जायेगें ,,,,,,

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,...

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

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  2. wah kya baat hai..kavi kee soch kaa bhee jabab nahi shandar..badhayee aaur sadar amantran ke sath

    उत्तर देंहटाएं
  3. खोजिये
    यही कही पर मिल जायेंगे
    कविता के बीज//
    बहुत सच लिखा आपने.
    बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  4. सास-बहु की खटपट में खोजे
    देवर-भाभी के चुम्बन में खोजे
    नेताओ के चाल-चलन में खोजें
    मिल जायेंगे

    कविता के बीज हर जगह मिल जायेगें सुंदर अभिव्यक्ति.......................

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