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मंगलवार, 10 जुलाई 2012

मुस्कुराहटों की किताब

आपके  गुलाबी  लवों  में बड़ा  दम है
हंसती कलियाँ भी,इनके आगे कम हैं //

 आपकी सुरीली अंखियों की क्या बात है
इनके आगे ,मयखाने की क्या औकात है //

आपकी मुस्कुराहटों पर लिख रहा हूँ किताब
परेशान हूँ   मैं  , पन्ने लग रहे हैं बे-हिसाब //

आपके उर के फ़राख की चर्चा है महफिल में
थक जाते है मांगते-मांगते नाशाद दिल वाले //

(उर के फ़राख = हृदय की विशालता
नाशाद = बदनसीब )

11 टिप्‍पणियां:

  1. आपके उर के फराख की चर्चा है मयखाने में '
    बहुत खूब |
    आशा

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  2. शुक्रिया आशा सक्सेना जी

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर रचना. वर्षा के मौसम मे

    जवाब देंहटाएं
  4. आपके उर के फ़राख की चर्चा है महफिल में
    थक जाते है मांगते-मांगते नाशाद दिल वाले //
    क्या बात है .. उम्दा सर जी

    जवाब देंहटाएं
  5. आपके उर के फ़राख की चर्चा है महफिल में
    थक जाते है मांगते-मांगते नाशाद दिल वाले //

    वाह ,,, बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  6. बहुत सुन्दर रचना....

    सादर
    अनु

    जवाब देंहटाएं
  7. आपके गुलाबी लवों में बड़ा दम है
    हंसती कलियाँ भी,इनके आगे कम हैं //

    बहुत सुन्दर

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  8. एक दीवार पे चाँद टंका था ,
    मैं ये समझा तुम बैठे हो !
    उजले उजले फूल खिले थे ,
    जैसे तुम बातें करती हो ...बढ़िया रचना लाते हो ...बब्बन भाई ,रोज़ आया करो .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    "आतंकवादी धर्मनिरपेक्षता "-डॉ .वागीश मेहता ,डी .लिट .,/ http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/
    ram ram bhai/

    बृहस्पतिवार, 23 अगस्त 2012
    Neck Pain And The Chiropractic Lifestyle
    Neck Pain And The Chiropractic Lifestyle

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