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रविवार, 25 नवंबर 2012

जाड़े की धूप हो तुम //




दोस्तों के ईदगाह हो तुम
मेरे ख्यालों के चारागाह हो तुम
उर्वशी की रूप हो तुम
जाड़े की धूप हो तुम //

नाजो -शोख में पली हो
माचिस की तिली हो
क्यों ओस सी चुप हो तुम
जाड़े को धूप हो तुम

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 26-11-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  2. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 26-11-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  3. वाह क्या बात है अनोखा अलग अंदाज
    अरुन शर्मा
    www.arunsblog.in

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  4. दोस्तों के ईदगाह हो तुम
    मेरे ख्यालों के चारागाह हो तुम
    उर्वशी की रूप हो तुम
    जाड़े की धूप हो तुम //

    नाजो -शोख में पली हो
    माचिस की तिली हो
    क्यों ओस सी चुप हो तुम
    जाड़े को धूप हो तुम
    प्रस्तुतकर्ता बबंपन
    अरे क्या बात है पांडे जी -सत्य ही रहता नहीं ये ध्यान ,तुम ,कविता ,कुसुम या कामनी हो ,.....गुनगुनी सी धुप हो ,इश्क की आंच हो ,जान हो मेरी .

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  5. झुलसा देती ग्रीष्म में, गोरा-गोरा रूप।
    किन्तु सुहानी सी लगे, शीतकाल में धूप।।

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  6. जाडों की धूप हो तुम---
    प्यार के अनेक रंग होते हैं.सुंदर

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  7. वाह . देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग रहिये.

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