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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

मेरे पिता जी का जन्म-दिन

हैप्पी बर्थ डे है आज
मेरे पिता जी का
उत्सवी माहौल है घर में 
घर के बाहर /चायनीज बल्ब सज गए है 
बैलून और झालर से उनका कमरा सजा है//

जिसमे अमूमन शायद ही कोई जाता है 
70 के है मेरे पिता जी 
पोतों ने शुरू की है उनके जन्म दिन मनाने की परम्परा
उनकी सेवा निवृति के बाद//

बड़े प्यार से पोछती है
धुल से सनी
उनकी ज़वानी की फोटो/मेरी पत्नी
जैसे पोछी जाती है
बापू की मूर्ति चौक-चौराहों पर 2 अक्तूबर को //

आज उनका बचत खाता खाली हो गया है
उनके पोते ने ख़रीदा है टैबलेट /
और बहु ने हीरे की अंगूठी //
पिता जी कहते है
ये सब बच्चो और तुम्हारे लिए ही तो है //

मुझे मालुम है
उनके पोते और उनकी बहु
कल से उनकी कोई कद्र नहीं करेंगे //

5 टिप्‍पणियां:

  1. आज पैसा है तो रिश्ते हैं ..... कटु यथार्थ को कहती रचना

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  2. उफ़ मार्मिक सत्य कह दिया।

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  3. अक्सर यही होता है जब तक पैसा है बुजुर्गों को मिलता है दिखावे वाला झूठा प्यार और सम्मान... गहन अभिव्यक्ति

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  4. बागबान की कहानी कहती पोस्ट बहुत खूब ......गहन अभिव्यक्ति

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