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गुरुवार, 16 मई 2013

रिश्वत


रिश्वत का बोलबाला है..
कोई काम हो तो कैसे
रिश्वत दी मैने उन्हें
मीठी बोली की //

 प्यार पाने को लोग
रिश्वत देते है फूलों की

जानते हैं !
आज सूरज क्यों है चमकीला और गर्म
जी हाँ !
चाँद  ने रिश्वत  दी है सूरज को
वह जितना गर्म होगा
चांदनी राज करेगी
सबके दिलों पर

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(18-5-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  2. WOW aaapane to KAYANAT ko bhi baandh diya aur lapet liya rishwat men...

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  3. विषय काल के अनुकूल और सुधारात्मक है !

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  4. आभार वंदना जी , रमाकांत जी ,देवदत्त प्रसून जी

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    साझा करने के लिए आभार!

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