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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

शमशान

लकड़ियों के ढेर पर पड़ा  है
पञ्च महाभूतों का समुच्यय
कुछ ने कहा था ..
विधुत शवदाह गृह में चलते है
मगर बूढ़े लोगों ने
फटकार लगाईं./धर्म की दुहाई देकर
अन्य वन कट लकड़ियों के बीच
थोड़ी सी ही सही
आम,बेल और चन्दन की लकड़ी खरीदी गई //

लकड़ियों का चिता बनाना सबको नहीं आता
सुराख़ देना ज़रूरी है
हवा के आने-जाने के लिए
मगर कुछ इस काम में भी माहिर होते है

डॉम हैसियत भाप लेता है
रकम लेने के बाद ही होती है मुखाग्नि
दो घंटे लगेंगे स्वाहा होने में
राम-राम सत्य है
के लगते हैं नारे
और चर्चा होती है .उमके अच्छे-कामों की
और चर्चा होती है .
ये धन-संपत्ति किस काम की //

आग में सब स्वाहा हो चूका है
लोगों ने स्नान किया
घाट की दूकान पर ही
छककर खाया ..पूड़ी-जलेबी और सब्जी
और फिर रम गए...
वही पुराने झूठ/फरेब /लालच के झंझावतों में 

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २४/१२/१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी,आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है।

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  2. सुंदर अभिव्यक्ति,भावपूर्ण पंक्तियाँ ...!
    =======================
    RECENT POST -: हम पंछी थे एक डाल के.

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  3. अब तो व्हिस्की
    और गिलास साथ
    ले जाने का रिवाज
    भी कहीं कहीं होता है
    जो कभी भी नहीं
    कहीं पीता है
    भूत नाराज हो जायेगा
    सुनकर प्रसाद ले लेता है !

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  4. बड़े अजीब है ये दिखावे के रिवाज .... सटीक अभिव्यक्ति

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  5. दुनिया की हक़ीक़त बयाँ करती रचना...

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  6. bahut khoob sir aapki hr line me sayad jaisa tapkta hai .bahut hi sunder abhivakti

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