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रविवार, 19 फ़रवरी 2012

बसंत के बहाने


खिलखिलाने ,गुदगुदाने का मौसम बसंत है
जीवन में खुशियाँ लाने का, मौका अनंत है //


न्याय की कुर्सी पर बैठकर , ईमान मत बदलो
झूठ,फरेब ,धोखा करने का मौका अनंत है //

राम अमर हो गए, जिन्होनें चख लिया जूठा बेर
दोस्तों ,गरीबों को गले लगाने का मौका अनंत है //

खूब फूलते-फलते है दोस्तों , पापी इस देश में
क्योकि पापों को धोने को ,यहाँ नदियाँ अनंत हैं //

16 टिप्‍पणियां:

  1. पापों को धोने के लिए नदियां बहुत है ...बहुत खूब ...

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  2. सर जी ..इस कविता में तो रंग के दर्शन हो गए वाह

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  3. राम अमर हो गए, जिन्होनें चख लिया जूठा बेर
    दोस्तों ,गरीबों को गले लगाने का मौका अनंत है //
    KYA BAAT KAHI SIR AAPNE... WAAH

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  4. ठीक ही लिखा है आपने !!हमारे देश में पाप करके पुण्य करने का रिवाज़ भी पुराना है....और पाप धोने के तरीके भी अनंत है...

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  5. राम अमर हो गए, जिन्होनें चख लिया जूठा बेर
    दोस्तों ,गरीबों को गले लगाने का मौका अनंत है //
    Bhut Achchhii kavita hai...
    Likhate rahie...

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  6. वाह!!!!!बहुत अच्छी प्रस्तुति, सुंदर रचना

    MY NEW POST ...सम्बोधन...

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  7. दोस्तों गरीबों को गले लगाने का मौका अनंत है........बहुत खूब

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  8. बसंत के बहाने आपने चिंतन का विषय दिया है।

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  9. ॐ नमः शिवाय !! महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये.

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  10. ,गरीबों को गले लगाने का मौका अनंत है // बहुत खूब भाई जी .......हर हर महादेव ....!!

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  11. क्योकि पापों को धोने को ,यहाँ नदियाँ अनंत हैं //bahut khoob Babbanji.......जीवन में खुशियाँ लाने का, मौका अनंत है ....very true.....

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  12. अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  13. बसंत के बहाने बहुत अच्छी बातें कह दी आपने... सुन्दर रचना... आभार

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  14. धारदार पंक्तियाँ ....बहुत अरसे बाद सुकून मिला

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