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शुक्रवार, 9 मार्च 2012

रावण सिंह

मेरे पड़ोस में रहते हैं -रावण सिंह
वे रामायण के रावण जैसे नहीं दिखते//

वे इन्कम-टैक्स भरते है
वे होल्डिंग टैक्स भरते हैं
वे वेल्थ -टैक्स भरते है
उनकी मूछें नहीं है
न ही खुटीदार दाढ़ी
नेता /पुलिस से उनकी छनती है
लोग दबी ज़वान से कहते है
उनके यहाँ हर किस्म की वाईन मिलती है //

वे मिलनसार हैं
फिर भी , पता नहीं क्यों
आम लोग उनसे डरते हैं//

अरे! एक बात तो भूल ही गया
वे सीता-हरण नहीं करते
बल्कि ,रोज नई -नई सीता
खुद ही चलकर
आती है उनके घर //

17 टिप्‍पणियां:

  1. Har ek me aisa ek RAVANSINH chhoopa hooa hota hai.Kisi ke bahyachar me dikhaee deta hai aur kisi ke Bhitar ke Charactor me.Aur charactor woh aisi chiz hai ki oose wohi jaanta hai aur Dusra Ishwar.

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  2. जिसका भेद खुल गया वो रावण सिंह,नहीं खुला तो रामसिंह कहलाता है ....

    MY RESENT POST ...काव्यान्जलि ...:बसंती रंग छा गया,...

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  3. एक रावण
    मेरे भीतर भी बसता है
    तभी मुझे भी
    रावण दिखते हैं
    पूंजीवादी युग का रावण
    सब कुछ करता है
    सीता -गीता और परिणीता
    इसे बहुत मानते हैं
    तभी तो चलकर आते हैं
    पुष्पक विमान अब है नही
    मर्सडीज़ में घुमते हैं
    शीला ,मुन्नी और जलेबीवाई
    इस रावण के लिए मरते हैं ..............

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  4. नयी रामायण तो नहीं लिखेंगे ये रावण सिंह ...

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  5. बहुत बढ़िया प्रस्तुति...
    श श श.... रावण मैन्गोमैन(आम आदमी) में बसता है | राम तो मंदिरों में घंटियों की लोरियाँ सुनता है |

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  6. मेरे पड़ोस में रहते हैं -रावण सिंह
    वे रामायण के रावण जैसे नहीं दिखते//

    वे इन्कम-टैक्स भरते है
    वे होल्डिंग टैक्स भरते हैं
    वे वेल्थ -टैक्स भरते है
    उनकी मूछें नहीं है
    न ही खुटीदार दाढ़ी
    नेता /पुलिस से उनकी छनती है
    लोग दबी ज़वान से कहते है
    उनके यहाँ हर किस्म की वाईन मिलती है // sundar aur majedar!!

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  7. बब्बन भाई बहुत ही अच्छा आप ने लिखा है

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  8. कभी बदलते ईमान धर्मं और कभी बदलते वेश
    न माने हम रिश्ते नाते न जाने हम देश प्रदेश
    हम जानते लूट खसोट और जाने अपना स्वार्थ
    कहा मजा अब देश प्रेम में भूल गए परमार्थ
    न रावण गया न कंश गया न कभी गए अंग्रेज
    हमी शिशुपाल हमी दुषाशन हम ही है चंगेज

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  9. सफ़ेद पाशों को बेन्क्काब करती हुई पोस्ट

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  10. Bahut Sunder, Sab ke Pados me Milte hai, Dikhta hai
    Dhanyawad

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  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  12. modern rawan hai...kuch to fark hoga hee..acchi rachna...sadar badhayee aaur amantran ke sath

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  13. हर जगह इस तरह के रावण दिखते हैं आजकल

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  14. मेरी समझ से.. रोज नई-नई के बाद सीता शब्द न होता तब भी बात पूरी हो जाती।

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