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मंगलवार, 2 अक्तूबर 2012

नेताओ की घड़ी


एक पत्रकार नरक में गया ...
उसने वहाँ कुछ घड़ियाँ देखी
कुछ घडी तेज चल रही थी
कुछ धीरे धीरे
एक घडी तो बिलकुल बंद थी
उसने पूछा ..
ऐसा क्यों हो रहा है ..
... नर्क के .. कर्मचारी ने बताया
जो जितना झूठ पृथिवी पर बोला
उसकी घडी उतनी तेज चल रही है
जो घडी नहीं चल रही है
वह विवेकानंद की घडी है ..

पत्रकार ने ..पूछा ..
नेताओं की घडी किधर है ..
कर्मचारी ने कहा ..
वह तो आफिस में लगी है ..
वो क्यों ..
क्योकि वह बहुत तेज घुमती है ...
हमलोग उसे पंखे की तरह
इस्तेमाल कर रहे हैं
( (टाइम्स ऑफ़ इंडिया से साभार )

12 टिप्‍पणियां:

  1. नेताओं की हवाबाज़ी ...!!

    बहुत खूब ...

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  2. नर्क के .. कर्मचारी ने बताया
    जो जितना झूठ पृथिवी पर बोला
    उसकी घडी उतनी तेज चल रही है
    जो घडी नहीं चल रही है
    वह विवेकानंद की घडी है ..
    SHANDAR BHAIYA JI

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  3. बढ़िया प्रस्तुति पाण्डेय जी नेताओं की तो हर बात निराली होती है

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  4. नेताओ की घड़ी

    एक पत्रकार नरक में गया ...
    उसने वहाँ कुछ घड़ियाँ देखी
    कुछ घडी (घड़ी )तेज चल रही थी.(थीं ).....घड़ी.....थीं
    कुछ धीरे धीरे
    एक घडी तो बिलकुल बंद थी
    उसने पूछा ..
    ऐसा क्यों हो रहा है ..
    ... नर्क के .. कर्मचारी ने बताया
    जो जितना झूठ पृथिवी पर बोला........पृथ्वी ....
    उसकी घडी उतनी तेज चल रही है
    जो घडी(घड़ी) नहीं चल रही है.......घड़ी ....
    वह विवेकानंद की घडी है ..

    पत्रकार ने ..पूछा ..
    नेताओं की घडी किधर है ..
    कर्मचारी ने कहा ..
    वह तो आफिस में लगी है ..
    वो क्यों ..
    क्योकि वह बहुत तेज घुमती है .......घूमती है ....
    हमलोग उसे पंखे की तरह..................यार बब्बन पांडे यह कविता अंग्रेजी के अखबार में कैसी छप सकती है ?अखबार का नाम चेक करें .रचना बढ़िया लाएं हैं .आभार .
    इस्तेमाल कर रहे हैं
    ( (टाइम्स ऑफ़ इंडिया से साभार )

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  5. Wonderful and befitting satire. Politicians of today are criminal and deserve to be condemended.

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