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सोमवार, 4 मार्च 2013

समर्पण

मैंने तुम्हारा हाथ माँगा था
तुमने तो दिल ही दे दिया 
मांगी थी थोड़ी सी खुशबु 
तुमने तो पूरा गुल ही दे दिया//

अर्ज किया था, थोड़ी सी रौशनी के लिए
तुमने तो  पूरा चाँद ही दे दिया
मांगी थी मुहब्बत की एक घूंट
तुमने तो पूरा जाम ही पिला दिया /

/

7 टिप्‍पणियां:

  1. कोई हद ही नही शायद मुहब्बत के फसाने की,
    सुनाता जा रहा है जिसको जितना याद होता है,,,,,


    Recent post: रंग,

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  2. अर्ज किया था, थोड़ी सी रौशनी के लिए
    तुमने तो पूरा चाँद ही दे दिया
    मांगी थी मुहब्बत की एक घूंट
    तुमने तो पूरा जाम ही पिला दिया //

    आप दोनों ने माँगने और पाने की हद कर दी।

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  3. अपने लिए तो कुछ बचाते ही नहीं ,
    संपूर्ण समर्पित
    खूबसूरत रचना ..........
    पाण्डेय जी

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  4. वाह बब्बन भाई...क्या रस भरा है आपने ...लाजवाब

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ !
    सादर

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

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  6. मांगी थी मुहब्बत की एक घूंट
    तुमने तो पूरा जाम ही पिला दिया
    खूबसूरत रचना ......!!!

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