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शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2013

एक पुल का आत्महत्या

क्यों खामोश है
ये पुल
लोगों के डर
सोखकर चुप है शायद

चुप रहने वाला पुल ..
लोगों को गिरने से बचाता है
गंतव्य तक पहुंचता है
दो घरों को जोड़ता है
दो संस्कृतियों को जोड़ता है

जिस दिन
 मीठे-मीठे बोलों का पुल
गिर जाएगा
उस दिन बहुत शोर होगा
और पुल आत्महत्या कर लेगा //



17 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. शुक्रिया यशवंत जी .. दीपावली की सुभकामनाएँ

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  2. अच्छी प्रस्तुति ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

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  3. कल 27/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. बहुत खूब ... प्रतीक के माध्यम से कितना कुछ कहती रहना ... संवाद जारी रहना चाहिए ...

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  6. इस पोस्ट की चर्चा, मंगलवार, दिनांक :-29/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -36 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

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  7. great message........... samwedansheel message jeeven k disha deta message....

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  8. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति......

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  9. बहुत ही सुन्दर, सार्थक संदेश!!!

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