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सोमवार, 11 नवंबर 2013

महताब को रोना आये

आलोकित हो पथ
जब पग बढे तुम्हारा
प्रचोदित हो जलद
जब अधर हिले तुम्हारा//

महताब को रोना आये
जब घूँघट उड़े तुम्हारा
सिंधु गरजे  बार-बार
जब हिले मेखला तेरा //

प्रचोदित .. आवेशित //माहताब -- चाँद 

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