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बुधवार, 5 जनवरी 2011

बादल (बाल -कविता )


सूख चूके है ताल -तलैया
और सुखी हैं नदियाँ
गर्मी से हैं सब पागल
जल बरसा नभ के बादल //

ज्येष्ठ की तपती गर्मी ने
जल को भाप बनाया
और पवन के झोंके ने
तुम्हें दूर -दूर फैलाया
मन पंक्षी उड़ता है
देख तुम्हारा रंग श्यामल
जल बरसा नभ के बादल //

तुम बिन सूखे बड़े जलाशय
पनबिजली की हो गई छुट्टी
सूख गई है घास खेत की
और धूल उड़ा रही मिटटी
घास बिना गैय्या है भूखी
और सब किसान है घायल
जल बरसा नभ के बादल //

10 टिप्‍पणियां:

  1. बच्चों के लिए इससे बढ़िया कविता हो ही नहीं सकती.ये कविता बच्चों को वन संरक्षण को प्रेरित करती है क्योंकि वनों के निर्बाध कटान से ही आज सूखे की समस्या उत्पन्न हुई है जिसकी ओर बादलों से बरसने का आग्रह करके लक्ष्य किया गया है.
    इस कविता की सार्थकता तभी है जब बच्चे इसके मर्म को समझ सकें.

    सादर

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  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (6/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  3. बहुत खूब !
    नव वर्ष की बधाई दोस्त !

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  4. बच्चों के लिए इससे बढ़िया कविता

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  5. बच्चों के लिए बिल्कुल बाल मन के अनुरूप है!

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  6. सुंदर रचना
    इस बार मेरे ब्लॉग पर
    " मैं "

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