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रविवार, 9 जनवरी 2011

भरपाई

बह चुकी है
केंद्र सरकार का खजाना
घोटालों की बाढ़ से //
भरपाई का एक सुझाव है मेरे पास
सरकार को सलाह देना कोई गुनाह तो नहीं //

सरकार मोटर -गाडी पर टैक्स लगाती है
अब पैदल चलने वालों पर टैक्स लगे
प्रदूषित हवा तो सब श्वास लेते है
शुद्ध हवा लेने वालों पर टैक्स लगे //

पक्षियों की कलरव
नदियों /झरनों की भाषा
सुनने /समझने वालों पर टैक्स लगे
हंसने /मुस्कुराने वालों पर टैक्स लगे //

उन कवियों /लेखकों /मिडियाकर्मियों पर
भारी -भरकम टैक्स लगे
जो सच बोलते और लिखते है
उन पर भी टैक्स लगे
जो सच जानना चाहते है //

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले न मिले
मगर सभी बिहारी मजदूरों पर टैक्स लगे
जो सत्तू खोर है //

आशा है ...
योजना आयोग इस पर गहन विचार करेगा
इतना टैक्स लगने के बाद
नेता लोग कितने भी घोटाले करे
देश का जी ० डी० पी ० प्रभावित नहीं होगा //

23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया ..
    काश इस को नेता भी पढ़ लें..

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  2. isko neta bhi padhenge to kuch nhi hoga
    unki aadat to kutto wali hi hai na

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  3. गहरा कटाक्छ ..
    वर्तमान सरकार के मुह पर एक जोरदार तमाचा ..
    ऐसे ही लिखते रहिये भईया .. सामाजिक समस्यायों पर .. !!

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  4. बबनजी,
    बिलकुल सही कहा, अलग अंदाज़ में ...!

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  5. बबन जी तरीका आपने बहुत खूब सुझाय
    सरकार बात मान कर करेगी अब उपाय

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  6. सरकार को अभी भी चेत जाना चाहिए....
    बहुत ही सुन्दर विचार हैं आपके....

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  7. बबन जी........इसे कहते है अपने पेरो पर कुल्हाड़ी मारना.......सरकार तो अपनी जेबे भरने के लिए कुछ भिकार सकती है.........गाय-भेंसो का चारा हि खा गए...........यह क्या चीज है.........हा हा हा हा......बहुत बढ़िया कटाक्ष........पर इन मोटी चमड़ी वाले बेशरम नेताओ पार कोई असर होगा.........पता नहीं.....

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  8. मुस्कान हो या मेरी खुशिंया
    सब को कर लो कैद तुम,
    बांध दो बेरियो में इनको
    अब हवा पे भी पहरे बिठा दो.

    फिर भी मेरी चाह मुझको
    सच का दामन थामने को,
    हर बार एक आवाज देगी
    तू कर्म पथ पर बढ़ 'प्रिय'
    तू बढ़ 'प्रिय', तू बढ़ 'प्रिय'

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  9. भारी -भरकम टैक्स लगे
    जो सच बोलते और लिखते है
    उन पर भी टैक्स लगे
    जो सच जानना चाहते है //
    Bahut khoob kaha hai babanji.......

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  10. बबन जी , यह क्या कर डाला , सीधे साधे आम आदमी पर और टैक्स लगा डाला................................इन नेताओं का क्या है.....................कहेंगे आप में से ही एक ने सुझाव भेजा था....................सो हमने मान लिया..................हा हा हा ..............बहुत बढ़िया!!!!

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  11. भ्राता श्री ये आइडिया देकर आपने ठीक नहि किया ! कोई अगर ये सोच रहा हो कि सरकार ये कविता पढ़कर कुछ सुधरने वाली है तो गलत सोच रहा है! सरकार इनमे से कुछ एक तो बहुत जल्द अपनाने वाली है! सबको मालुम है मनोरंजन टैक्स के बहाने किस किस का गला घोंट रहि है...लेकिन इतने सुन्रदर प्रस्तुति के लिए कोटि कोटि बधाई !

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  12. बहुत ही सही विवेचना किया आपने..बहुत खुब बबन भाई जी

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  13. बहुत बढ़िया तल्ख़ प्रतिक्रिया है भाई साहब,बस एक अंतिम
    उपाय और है कि देश को बेच डालो,फिर फिरंगी को न्योता दो,
    जो तुमने लूटने के बाद छोड़ा वो हम खा गए,,लो खंडहर संभालो,
    "नेताओं ने मारे जवां कैसे-कैसे
    ज़मीं खा गई आसमां कैसे-कैसे"

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  14. उन कवियों /लेखकों /मिडियाकर्मियों पर
    भारी -भरकम टैक्स लगे
    जो सच बोलते और लिखते है
    उन पर भी टैक्स लगे
    जो सच जानना चाहते है //
    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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  15. वाह अच्छे कटाक्ष ...पर बबन जी ये सब जरा जमीं पर चलने वाले लोगों के लिए है की कही बुद्दी जरा ठीक हो जाये ...पर इन गिरे हुए नेता का क्या करें ...ये मरे तो भी हम प्रभावित ...न मरे इसके लिए भी चारो और हमारे पैसों के आदमी ...हम ही प्रभावित ...पर कान में जो रुई लगाराक्खी है उसका क्या करें !!!!!!!!

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  16. अब पैदल चलने वालों पर टैक्स लगे,हंसने /मुस्कुराने वालों पर टैक्स लगे /जो सच बोलते और लिखते है
    उन पर भी टैक्स लगे.
    बहुत ही अच्छा लिखा है आपने.

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  17. "बाढ़-बाढ़ देखो, हजार बार देखो कि देखने की चीज है हमारा देश डुबा।"

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  18. इसी वित्तीय वर्ष में ये सब टैक्स शामिल होने की पूरी संभावना है L आपका शुक्रिया गवर्नमेंट को अछा सुझाव देने का हहहहहहः

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  19. क्या मारा है. करारा है.. आभार

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  20. bda dard hai is vyang mein...kash kabhi neta bhi samjh paate is ko....bahut khoob babban jee

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