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शुक्रवार, 28 मई 2010

मन्त्र का रहस्य

ऋग्वेद !!
१०२८ मन्त्र
प्रार्थना मंत्रो का संग्रह
प्राचीनतम धर्मग्रन्थ
रचना -१५०० से ९०० ईसा पूर्व
अनेक देवी -देवतायो का वर्णन

साम वेद: दैनिक पूजा के निमित्त
कुछ ऋगवेदिय मंत्रो का संग्रह
यों समझिये ऋगवेद का छोटा रूप
जुवेद : यग्य को संपन्न कराने का अधिनियम
अर्थव वेद : जादू - टोना के मन्त्र .....
ऋगवेद का एक मन्त्र ......
गायत्री -मंत्र कहते है ...इसे
भूर्भुवः स्वःतत्सवितुवरेनयम
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात
आज भी प्रासंगिक है ...

मन्त्र .....एक वृति
यह वृति रोम -छित्रो को खोलती है
और मन -मस्तिस्क को एकाग्ग्रित करती है ..
इस मन्त्र में सूर्य की प्रार्थना है ....
सूर्य .... सभी उर्जाओ का स्रोत है

आज कल के मन्त्र पर नज़र डाले ....
और किसी को वश में करना हो
मन्त्र मारिये .....
लफफेवाजी का
रुपयों की थैली का
दिखावापन का मन्त्र भी मार सकते है
मगर हां
पैसो के आगे जाती का मन्त्र बेअसर होगा
चुनाव में राजनेता ....
जनता को वश में करने हेतु
मन्त्र मारते है
और सम्मोहित कर लेते है
काम निकालने के लिए
नौकरशाह के प्रति कशीदा गढ़ना भी
मन्त्र से कम नहीं
त्रिया -चरित्र में तो अनेको मन्त्र है .

आज
सभी वेदों के मन्त्र की परिभासा
हमने बदल दी है ...

1 टिप्पणी:

  1. Bhai Ji,sahi kaha aapne aaj kal Mantro ki Paribhasha ham ne badal di hai...Jiska vyakhan karana karana bahut hi muskil hai( jat-pat, dharma ati ke naam par)...aaj samaj ke liye ye ek bahut bada mudda hai...is lekh ke liye aap dhanyabaad ke patra hai...

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