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शुक्रवार, 21 मई 2010

पेंटिंग








अगर आप ....
हाथो में बनी लकीरों के फकीर है ...तो
यह कविता आपके लिए नहीं है

जिन्दगी !!!!!!
एक कोरा कागज है ... मेरे दोस्त !
मिटा सकतो हो .....
इस पर लिखी पहले की बातें ....
बिना किसी रबड़ के
पुनः जब चाहो ....
नया लिख सकते हो

मेरी बातों में विश्वास हो तो ...
पढ़ लो ....
"अंगुली मॉल'' के बारे में ... जो डकेत से
वाल्मीकि ऋषि बन गए
वासना के प्रेम में पागल ......
उस लड़के के बारे में भी पढो
जो तुलसी दास बन गए

जब विस्वास जम जाए ...
जिन्दगी के कोरे कागज में
एक खूबसूरत पेंटिंग बनाओ ...

जिन्दगी .....
कोई .शराब की घूट नहीं ...
जिसे फ़ेंक दो ... या पीओ
मेरे दोस्त !!! इसे जियो
जीने का नाम ही जिन्दगी है

21 टिप्‍पणियां:

  1. सत्य वचन..जिंदगी जिन्दादिली का नाम है ...!

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  2. Ek bahut hi sakaratmak soch drashati sunder rachna, sahi kaha Baban ji, ham apni jindagi ke kagaz per kuch bhi likh sakte hai, apni takdeer me khushio ka izaafa karna hamare hi hath me hai puri tarah..........Jindagi jindadili ka naam hai murdadil kya khak jiya karte hai............:))

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  3. जब विस्वास जम जाए ...
    जिन्दगी के कोरे कागज में
    एक खूबसूरत पेंटिंग बनाओ .............वाह बबन जी ....बहुत की खूब सूरत जीवन के मायनो को आप ने शब्दों का रूप दिया है ...कभी कभी आप चोका देते हो ..हा हा हा हा ...खेर आप को शुभ कामनाएं !!!!!!!!!!!!!!!!

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  4. बबन जी! आपने सौ फ़ीसदी सच कहा है....किस्मत हम से भी संवरती है और बिगरती है... तकदीर और किस्मत उनके भी होती है जिनके 'हाथ' नहीं होते भीर हाथ के लकीरों में नहीं अपने मेहनत पर भरोसा करके ही इंसान अपना मंजील पा सकता है.
    इस साकारात्मक एवं प्रेरणादायी रचना के लिए मेरा हार्दिक धन्यवाद स्वीकार करें.
    प्रस्तुत रचना में उल्लेखित उदहारण उन सभी के लिए प्रेरणा श्रोत है जो अपना किस्मत लकीरों में ढूंढते हैं और फकीरों के निर्दयता के शिकार हो जाते हैं.
    बहुत दिनों के बाद इस तरह के रचना का पाठ किया...प्रेरणादायी है....
    सादर!

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  5. Baban ji , I love this poem, it's so encouraging, so beautiful. It does not have any new content..............but the way the content is presented................it's great, Keep it up!!!!

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  6. बहुत ही अच्छी और प्रेरणादायी कविता ! सचमुच हमारे अतित मे कई लोगों ने अपने कर्म से अपने जीवन मे बहुत ही ऊंचे मुकाम पाये हैं और महापुरुष कहलाए !

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  7. अपने भाग्यविधाता हम स्वयं हैं...
    सुन्दर सन्देश!!!

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  8. बबन जी...बढ़िया रचना आपकी ...बिल्कुल सही बात............अगर अपने पर भरोसा हो तो हाथ कि लकीरे भी बदल जाती है.......हम कर्म प्रधान युग में रहते है......जहा कर्म ही सबसे बड़ा है......इसलिए बस अपने पर और अपनी क्षमताओ पर भरोसा रखो और आगे बढ़ो.........

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  9. एक चाह जो हो तो हसीं होती है जिन्दगी,
    हरेक केनवास में अपनी तस्वीर दिखाती है जिन्दगी.
    बस राह एक ऐसी चाहिए 'प्रिय'
    जहा रंग सपनो के हम सजा सके....

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  10. bahut hi acchi baat kahi hai baban ji
    indagi vastav main kanvas ki tarah hi har pal ek nya rang bharne ko taiyaar.

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  11. कोई शक नही जिंदगी के केन्वास पर जैसा रंग भर सको... सुंदर अभिव्यक्ति बबन जी

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  12. बिलकुल सच है यह ....नसीब हाथ की लकीरों में नहीं होता वो दृढ इच्छा शक्ति से सवरता हे ...

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  13. कल 07/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  14. जब विस्वास जम जाए ...
    जिन्दगी के कोरे कागज में
    एक खूबसूरत पेंटिंग बनाओ ...


    बहुत सही!

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  15. बहुत खूब...

    सार्थक रचना..

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  16. सुंदर सार्थक अभिव्यक्ति!

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  17. Bahut khoob.. :)

    kabhi samay mile to mere blog par bhi aaiyega.. :)
    palchhin-aditya.blogspot.in

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  18. जिन्दगी .....
    कोई .शराब की घूट नहीं ...
    जिसे फ़ेंक दो ... या पीओ
    मेरे दोस्त !!! इसे जियो
    जीने का नाम ही जिन्दगी है ॥

    सुंदर प्रस्तुति.

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