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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

रैगिंग --3

दुसरे दिन सुबह मैं दस बजे हास्टल पहुँच गया था /एक रूम में तीन लडकों के लिए जगह थी /हम तीनों जने पहुँच चुके थे /आज रात होने वाली उत्पीडन कार्य अर्थात रैंगिंग के विषय में सोच -सोच कर हम डरे हुए थे /शाम आठ बजे से मेस में खाना मिलना शुरू हो गया था /थके होने के कारण हम सभी बिस्तर पर अपना देह सीधा करना चाहते थे /

रात का खाना खाकर जैसे ही रूम में दाखिल हुए कि होस्टल के वार्ड -सर्वेंट ने बताया कि सभी लोगो को हास्टल न० १ के अंदर लान में जामा होना है /नहीं जाने पर पिटाई भी होगी / वार्ड सर्वेंट से पूछने पर वह बताया कि आप लोगो को नंगा कर दौड़ाया जाएगा /सेकेण्ड ईयर के छात्र हमलोगों की छाती पर मूंग दलने की तैय्यारी में थे / फर्स्ट इयर के सभी छात्र ..चाहे वो सिविल के हों,या मैकेनिकल के ..पांच मिनट के अंदर हास्टल न ० १ पहुँच चुके थे /

एक सीनिअर की आवाज आई - प्रथम वर्ष में आपलोगों का स्वागत है आपलोगों से परिचय का सत्र अब शुरू होने ही वाला है .आप सब एक लाइन में खड़े हो जाए /जब एक बोलू तो सब लड़के अपना शर्ट उतार देंगे ...दो बोलू तो बनियान तीन बोलू तो पैंट और चार बोलू तो अपना जाघिया निकल देंगे /

2 टिप्‍पणियां:

  1. रैंगिंग के दिन ऐसे ही थे.......मै तो भूल गया था...अब तो हम खुद बन गये सुपर सीनियर..और बस दो तीन माह बाद ये सब बस यादों के पन्नों में सिमट जायेंगे।

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