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रविवार, 20 फ़रवरी 2011

नोक -झोक


नोक -झोंक है क्या
बहुत माथा-पच्ची की
आप भी उदहारण से ही समझे //

अगर पत्नी ने कहा--
मेरा जेवर पुराना हो गया है
इस बदलकर थोड़ा भारी
जेवर ले दो//


अगर आपका उत्तर है
चलो अभी चलो
सुनार की दूकान
तो ये हुई प्यार की बातें
अगर आपने गलती से कह दी
"क्या करोगी गहने लेकर
तो आपने नोक -झोंक की शुरुआत कर दी //

यानी
सकारात्मक जवाब -- प्यार
ऋणात्मक जवाब - नोक -झोंक //

14 टिप्‍पणियां:

  1. सकारात्मक के साथ उसी अनुपात में नकारात्मक प्रसंग को मिला दिया जाय तो उसके नतीजे को पक्का प्यार कहा जायेगा! नोक-झोंक से ही प्यार की गहराई और उसकी मजबूती मापी जा सकती है सो नोक-झोंक 'सुखद' मगर मशालेदार घटना है.... शाम के समय चाय के साथ.... बड़ा अछ्छा वक़्त होता है..... ! दिन-भर की भागमभाग के बाद ऐसी एक अदद कप चाय तो बनता है!!
    सादर

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  2. बहुत अच्छी तरह समझा है पत्नी के स्वभाव को..शुभकामनाएं

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  3. भई ऐसी नोक - झोक पति से ही तो की जा सकती है, सात फेरों की कसमें और दीजिये सकारात्मक जवाब - प्यार...

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  4. बड़ा मजेदार शब्द है...."नोक-झोंक"...खैर जब इसका अनुभव होगा तब देखेंगे....

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  5. पाण्डेय जी भाभी जी को न बोलोगे तो नोंक-झोंक तो होनी ही है......और फिर शादी के समय ही पंडित जी जो मौखिक अग्रीमेंट पढ़ के सुनाते हैं ...भाई ये भी तो उनमे से एक है.

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  6. भई, विकत समस्या है ऐसी परिस्तिथि में स्वयं को बचा पाना, हाँ बोलें तो जेब कटी, न कहें तो बीबी रूठी,,,,

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