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बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

भारतीय वकील


सत्य की मैं टांग खीचता
झूठ को ताज पहनाता हूँ
काला धन को भी मैं
उजला कर दिखलाता हूँ
औरत के आंसू न पोछू
लुट लेता हूँ उसका शील
मैं हूँ भारत का वकील //

बात -बात पर खिचू
मैं कानून का बाल
तर्कों का छुरा मै घोपू
पुछू बेतुका सवाल
उन चोटों को मैं नहीं देखता
जिसने तोड़ा आपका दिल
मैं हूँ ,भारतीय वकील //

5 टिप्‍पणियां:

  1. ye sab tabhi tak kaha ja sakta hai jabtak aap ya any kisi ko vakil ki jarurat naa padi ho! khair doston ko wakil ki kabhi jarurat na aan pade ,aisi duaa haradam karta rahoonga.

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  2. वाह ... बहुत सुन्दर मन को भावुक कर दिया आभार / शुभ कामनाएं

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