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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

तुम्हें देखकर मन मचलता


तुम्हें देखकर मन मचलता
और मचलती मेरी कलम
बैठो पास ज़रा मुस्कुराकर
कविता लिखनी है तुम पर सनम //

आँचल तेरे छंद बनेगें
गाएगे सुर तेरे पायल
तेरे कंगन की छन-छन सुन
मेरी कविता हो गई पागल //

21 टिप्‍पणियां:

  1. बबन जी
    नमस्कार !
    बहुत खूब..शानदार रचना

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  2. वाह ... बहुत सुन्दर कविता मन को भावुक कर दिया आभार / शुभ कामनाएं

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  3. आँचल तेरे छंद बनेगें
    गाएगे सुर तेरे पायल
    Superb !

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  4. छोटी सी पर सुपर्ब कविता बब्बनजी
    आँचल तेरे छंद बनेगें
    गाएगे सुर तेरे पायल
    तेरे कंगन की छन-छन सुन
    मेरी कविता हो गई पागल

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  5. जब बसन्त सामने हो तो हृदय से भाव के अंकुर तो फूटेंगे ही!
    सुन्दर रचना!

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  6. गुनगुन करता रहे
    खुद से कहता रहे
    देखे खुद को कभी
    पूछे खुद से कभी
    ताके धरती अम्बरSSSSS
    पगला ये मन ..................

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  7. kya baat hai,bahut khub baban bhayi, iss baar to thoda aur likhte to achcha lagta

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  8. Sunder rachna, Baban Ji,
    Yeh shokh nazrein, yeh quatil adaayen,
    Karke ishaare hamein chupke se bulaayen,
    Muskuraahat pe teri hamne likhi ha ghazal,
    nazron se kah do ki zara padh ke sunaayen!

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  9. वाह पांडे जी आप ने तो दिल ही जीत लिया , अब आप हमें आशीर्वाद भी दे ही दीजिये

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  10. सुन्दर छोटी सी ख्वाहिश .. वाह.. सुन्दर बोल ..

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  11. बड़ा प्यारा अनुरोध है, इस अनुरोध मैं तारीफ और सोम्य शरारत का मिश्रण भी है...
    कविता लिखते-लिखते कंही आप शायर न जाएँ....! अनुरोध जारी रखिये...
    बनना-संवारना उनका हक है, और तारीफ करना हम सब का फ़र्ज़....!
    सादर!

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  12. बड़ी ही प्यारी रचना....भाई जी....बहुत खूब..

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  13. आपकी कवितायों पर टिप्पणी देने क लिए अभी समय लगेगा
    क्योंकि अभी मैं सीखने के दौड़ से गुजर रहा हूं और आपसे भी सीखूंगा .

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