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सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

प्रकृति के रिश्ते



ये पेड़ ...
जो नर्म पत्तो
और खिलखिलाते फूलों से लदी हैं
नंगेपन का एहसास झेला है
पतझड़ में //

ये माँ ....
जो बच्चो के साथ
खिलखिला रही है
प्रसव की पीड़ा झेली है //

ये किसान ...
जो आज लहलहाती फसलें
काट रहा है
कड़े धूप की जलन महसूस की है //

बड़ा ही सीधा सम्बन्ध है
सुख -दुःख के बीच //

11 टिप्‍पणियां:

  1. Babanjee Bilkul sahi kaha aapane..Sabhi ko ek prakar se Prasav Vedana to sahani padti hai tabhi usaka pratifal milta hai..

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  2. Ek rachana likhate samay vicharo ko bhi prasav vedana sahani padati hai tabhi jaakar i prakar ek sunder si rachana ka janm hota hai..

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  3. बड़ा ही सीधा सम्बन्ध है
    सुख -दुःख के बीच ...


    बिल्‍कुल सच कहा है ...।

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  4. बिलकुल सही कहा सर!

    बसंत पंचमी की शुभ कामनाएं.
    .
    सादर

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  5. वो तो है बबन जी अटल सत्य सुख दुःख दोनों एक दुसरे के बिना अधूरे.. सुन्दर रचना....

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  6. बहुत अच्छी लगी धन्यवाद

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  7. सुख दुःख जीवन का अभिन्न अंग है....

    बहत सुन्दर रचना... बधाई....

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  8. नंगेपन का एहसास झेला है
    पतझड़ में //
    u r gret SIR jeeeeee

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  9. वाह ... बहुत सुन्दर कविता मन को भावुक कर दिया आभार / शुभ कामनाएं

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