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बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

ऐसा है मेरे सपनों का बिहार


मैं जल संसाधन विभाग बिहार सरकार में सहायक अभियंता हूँ । २२ वर्षों के सेवा काल में मैंने अनुभव किया कि
बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि को चौपट करने का काम बाढ़ का है । पलायन का दंश और भौतिक विकास, बाढ़ से सीधे तौर पर जुड़े है । आज लगभग ३३२८ किलो मीटर लम्बे तटबंध के बाद भी हम यह कहने की स्थिति में नहीं है कि हमें बढ़ से मुक्ति मिल गई है ।

आजादी के ६२ वर्षों के बाद और केन्द्रीय जल आयोग के गठन के बाद भी हम नेपाल जैसे छोटे देश ,जिसे हमारे देश से नमक के साथ -साथ पेट्रोल डीजल भी भेजा जाता है ,को बाँध बनाने के लिए राजी नहीं कर सके । बिहार के सौवें साल के संकल्प के रूप में हमारे मुख्यमंत्री समेत अन्य मंत्री और सरकारी पदाधिकारियों को यह संकल्प लेना होगा कि हम बिहारवासी स्वं नेपाल से रिश्ते सुधार कर बाढ़ को रोकने में कारगर होंगे । जैसे ही बाढ़ की समस्या से हमें निजाद मिलेगी ,बिहार का विकास का कृषि विकास चरम पर होगा और हम खाद्य उदपाद में मामले में हरियाना ,पंजाब ,उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को मात दे देंगे।

साथ -साथ हमें हर खेत तक पानी पहुंचाने का भी संकल्प लेना होगा । मैं अपने विचार से बिहार की शस्य श्यामला अन्न उगलने वाली धरती पर कृषि आधारित फैक्ट्री को छोड़कर अन्य क्षेत्र के फैक्ट्री लगाने के पक्ष में नहीं हूँ । अगर ऐसा होता है तो देश से ही नहीं , विदेशों से भी लोग आने वाले वर्षों में शुद्ध वायु की खोज में बिहार का पर्यटन करने आयेगे । जय बिहार जय भारत


बबन पाण्डेय
कौटिल्य नगर
पोस्ट शास्त्री नगर
पटना -23

3 टिप्‍पणियां:

  1. Follow my blog and I will follow yours in return THANKS!
    http://dineshpareek19.blogspot.com/2010/11/blog-post_6807.html

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  2. sundar vicharottejak lekh... kya baandh baad ko rokne me kaaraagaar hain.... mai to yahan tehri dem dekhti hun to dar jaati hun kee kabhi kisi bhi prakritik aapdaa se dem ko koi haani huvi to vinaas pahado se hota huva maidaano me hazaron ko leel jayega ..... yah mera dar hai... kai varshon se pani ko roka jaa raha hai bagirathi bilkul sookh chuki hai...

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  3. वाह ... बहुत सुन्दर मन को भावुक कर दिया आभार / शुभ कामनाएं

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