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शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

अयोध्या --तीन कविताएं

.............(१)..........
अयोध्या को
हमने बना दिया है
एक अखाडा
जहां राम और रहीम का दंगल
कराने को आमदा है हमलोग ॥

ऊपर बैठा इश्वर
ठठाकर हंसता है
कहता है
मैंने बनाया मनुष्यों और जानवरों को
मगर जानवरों ने नहीं बनाया
अपना धर्म इंसानों की तरह ॥


............(२)................

मुझे तलाश है
हिन्दू धर्म मानने वाली
एक अदद गाय की
ताकि ,उसका दूध
मैं पी सकू और
पिला सकू अपने बच्चे को
क्योकि मैं हिन्दू हूँ ॥

मेरा मुस्लिम मित्र भी
तलाश में है
मुस्लिम धर्म मानने वाली गाय की
ताकि वह
उसका दूध अपने बच्चे को पिला सके ॥


हम दोनों
अयोध्या आये है
ऐसे ही गाय की खोज में
ओ !....
अयोध्या के मौलवियों /पूजारियो
अगर कही मिलता हो
अलग -अलग धर्म मानने वाले जानवर
तो अवश्य बताये ॥

-----------(३).......

अयोध्या .....
जहां मिलता था अहर्निश
शंख और घड़ियाल का स्वर
अब मिलती है
सैनिकों के बुटो की खटखटाहट ॥

मुस्लिम कहते है
वह मस्जिद कैसा
जिसमे नहीं पढ़ी गयी नवाज़ १२ वषों तक
हिन्दू कहते है
कण -कण में विराजते है राम ॥

तो फिर यह कैसी लड़ाई
कितना फर्क है
हमारी कथनी /करनी में



4 टिप्‍पणियां:

  1. sach hai hum janmte hain insaanroop mein par insaaniyat virasat mein nahi milti... humanity is cultivated through our earthly existence!
    kahin padha tha-
    "jhar gayi poonch ..romant jhare
    pashuta ka jharna baki hai!
    bahar bahar tan sanwar chuka
    ...man abhi sanwarna baki hai!!"

    sandeshpurna kavitayen !
    regards,

    उत्तर देंहटाएं
  2. अयोध्या के मौलवियों /पूजारियो
    अगर कही मिलता हो
    अलग -अलग धर्म मानने वाले जानवर
    तो अवश्य बताये ॥....sundar tipnne aap ki !!!!!!!!!Nirmal paneri

    उत्तर देंहटाएं
  3. i agree in toto to you sir. the reality has been very aptly expressed

    उत्तर देंहटाएं

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