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मंगलवार, 28 सितंबर 2010

फैसला अयोध्या का

सबको.....
फैसले का है इंतज़ार॥


कौन जीतेगा
कौन हारेगा
बजेगा शंख
या होगा अज़ान
या फिर शुरू हो जाएगा
एक नया घमासान
सोच -सोच कर सब है बेज़ार ॥

हम फैसले की नहीं
अपने दिल की सुनेगें
जब बैठा ही दिल में खुदा
तो बांकी बाते है बेकार ॥

कहीं ये फैसला
बढ़ा न दे
राम -रहीम का फासला
उजड़ न जाए
कितनों का घोसला
और समाज हो जाए तार -तार ॥

4 टिप्‍पणियां:

  1. Faisla to aa gaya...60 sal baad hi sahi.Ab ham bharatvasi ko Brarat ke hit ke liye ise man lena chahiye...Manav Dhram aur manavata se badakar kuch bhi bada nahi hai...Ati sundar rachna hai.

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