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रविवार, 3 अक्तूबर 2010

बापू !..मैंने आपको बदनाम नहीं किया

मेरे प्रिय बापू ....
मैं नौकरशाह हूँ
अंग्रेजों ने अंग्रेजियत सीखा दी
चमचमाती कुर्सियों पर बैठता हूँ
लाल -बत्ती वाली गाडी में घूमता हूँ ....
सब लोग मुझे भ्रष्ट कहते है
घपलेवाज कहते है
गलत भी नहीं कहते लोग ॥


मगर ....
मैंने आपको बदनाम नहीं किया बापू
हटा दी थी मैंने
आपकी तस्वीर /अपने कमरे से
जब भेजी थी फ़ाइल
घोटाले /घपले की मंत्री ने
मुझ से हस्ताक्षर कराने ॥

4 टिप्‍पणियां:

  1. may gandhian philosophy become a way of life....
    there is no other means for salvation!!!
    ...a poem that incites us to think...
    that we need not remove gandhi's pic but we need to get rid of foul undertakings!!!!

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  2. बहुत बढ़िया, मैं कायल हो गया आपके इस विकल्प का...:)

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