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शनिवार, 23 अक्तूबर 2010

शरीफ दिखने का पाखण्ड

मैं हूँ ....
अंदर से बदमाश
भले ही शरीफ दिखता हूँ
यों कहिये ...
शरीफ दिखने का पाखण्ड करता हूँ ॥

मेरे राह के रोड़े है
मिट्ठी भर ईमानदार
पुलिस /सरकारी पदाधिकारी और समाज ॥

समाज से तो मैं सलट लूंगा
आज कल लोग
खुद -व -खुद डरते है हमलोग जैसों से
जैसे ही मेरे पास
इन ईमानदारों के
खरीदने लायक पैसा हो जाएगा
कमीनो की दुनिया में
शायद ....
मेरा नाम अव्वल होगा
ऐसा मत सोचिये
मैं अकेला हूँ
मेरे समर्थक बहुत सारे है ॥

24 टिप्‍पणियां:

  1. बबनजी,
    आजकल तो इन्हीं छुपे रुस्तमों के भरोसे देश और समाज चल रहा है...
    आपकी पैनी नज़र इनपे भी है...!!! बधाईयां...!!!

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  2. Babanji, samarthak to shayad imaandaaron ke bhi utne hi hain jitne in sharif badmaashon ke....par afsos, imaandaroon ke samarthak thode buzdil jyada hai(jiski wajah aap hum jaise bakhoobi jaante hain)....sharif badmaashon ka samarthan karne wale darte nahin hai...we khul kar saath dete hain...raavan rajya jo hai!!!!

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  3. पाखंड को बेनकाब करती अच्छी कविता।

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  4. मैं अकेला हूँ
    मेरे समर्थक बहुत सारे है ॥
    nice satire...

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  5. waah pandey ji bahut sundar, par head line should be

    mai seqular hu
    मै सेक्युलर हू

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  6. बेह्द उम्दा रचना ।


    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (25/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  7. भाई मैं तो पहले ही कह चूका हूँ मेरे फेसबुक के वाल और दिल के वाल में बहुत अंतर है, उल्टा भी हो सकता है.

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  8. बब्बन जी : बहोत अद्भुत और एक और सुन्दर रचना आपने लिखी है जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए , हार्दिक बधाई हो !

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  9. सही कहा बबन जी.............भरा पड़ा हैं हमारा देश ....इस तरह के लोगो से जो देखने में तो शरीफ दिखाई देते हैं.........पर होते बहुत बड़े पाखंडी हैं......वैसे जब तक पकडे नहीं गए तब तक इसी जमात में रहते हैं लोग........या कुछ लोग ऐसे होते हैं जो खुल कर कुछ कहते भी नहीं पर.काम भी नहीं करते तो समझ आ जाता हैं कि यह कौनसी बिरादरी के लोग हैं......एक बहुत अच्छी रचना आपकी...........बबन जी...

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  10. Babban Bhai....Bahut khoob....ZOR KA JHATKA DHEERE SE....aap ke lekhan ki yehi to khubsurti hai ke aap jiske khilaf likhen woh bhi agar padhe to aap ki lekhni ki tareef karega...bas isi tarha sach ko aaina dikhate rahiye....all the best...Rizvi

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  11. Shri Baban bhai ji, bahut khub...is KALYUM pakhandiyo ke bharose hi to aaj kal ka samaj chal raha hai...
    मेरा नाम अव्वल होगा
    ऐसा मत सोचिये
    मैं अकेला हूँ
    मेरे समर्थक बहुत सारे है ॥
    bilkul sahi kaha hai aap ne ye akele nahi hai..
    in ka samarth aneko hai...
    PAKHANDIYo ke upar aacha vyangatamk..rachana hai...dil ko khubh bhaya...
    aap ki har ek rachana mujhe pasand aati hai...
    Dhanyavaad...

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  12. शरीफ दिखने का पाखण्ड करता हूँ .... बहुत खूब बबन जी

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  13. Sahi kaha sharafat ka mokhota oude bahut se safedposh mil jaate hai har mod per, jinka dil to kala hai, jiski kalikh ko vo apne safed kapdo se chipate hai....aise logo ki kami nahi hai samaj me, jo apne paise aur takat ke bal per insaan ko hi nhi uske jameer ko bhi kharidna chahte hai....ek bahut hi sunder rachna, inke chehro per pade nakab ko hatati hui............

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  14. Bahut hi sundar rachna bhai sahab ji. inki pahchan hi alag hai. hum aur aap sabhi pahchante hai isko.

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  15. ऐसा मत सोचिये
    मैं अकेला हूँ
    मेरे समर्थक बहुत सारे है

    सहमत हूँ आप से

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  16. Dear Babanji, really you are wonder of the wonder. Very effective poem. With best wishes. Please visit my blog "kahani.kavita.blogspot.com".

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