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सोमवार, 25 अक्तूबर 2010

मैं माहिर हूँ ....

रात -दिन
लगा लगा रहता हूँ मैं
तोड़ -फोड़ में ॥
कभी बातों को
कभी वादों को
तो .....
कभी किसी का दिल तोड़ता हूँ ॥

कितना सरल होता है ....
तोडना
माँ -पिता के सुनहले सपने
दोस्ती का मजबूत धागा
अग्नि का सात फेरा
और धर्म का घेरा ॥

जोड़ना बड़ा कठिन है
और मैं ....
जोड़ने में नहीं
तोड़ने में माहिर हूँ ॥

20 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khoob baban ji sachmuch todna bahut aasan hota hai kisi bhi bandhan ko, lekin jodna utna hi mushkil.....vo kaha hai na Rahim ji ne....Rahiman dhaga prem ka mat todo chatkaye, toote phir na jude, jude gaanthh pad jaye,.............

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  2. Babanji, bilkul sahi farmaya aapne....todna jitna saral, jodna utna hi mushkil.
    Kabir ji ne kaha hai....

    Meetha Sab se boliye,
    Faile sukh chahun ore!
    Washikarn hai mantra yehi,
    Taj de vachan Kathore !! Nice Topic!!!

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  3. jodna bahut kathin hai...
    kayi buniyaadein hain jo jod hetu aawasyak hain...aur wahi vilupt aaj ke daur mein , kathin to hoga hi jodna!
    satya kathan!

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  4. कभी 'आदत.. मुस्कुराने की' पर भी पधारें !!
    my new post
    .....मेरी प्यारी बहना

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  5. भ्राता श्री कविता बहुत ही सुन्दर है! लेकिन मुझे ऐसा लगता है ईन्सान जन्म से ऐसा नही होता है और ना ही इसके लिए कहिं से शिक्षा लेता होगा! कुछ परिस्थितियाँ ऐसी हो जाती है जो हमे जोड - तोड करने पर मजबुर करती है और हमारा स्वार्थ एसे कामो का सृजन करता है फिर भी मरा तो यहि मानना है.........कि..

    उनको खुद का पता नहीं होता , जिनके घर आईना नहीं होता! वक्त सबको बुरा बनाता है,आदमी खुद बुरा नहीं होता!!

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  6. Bhai Ji,ye samy ka dosh hai...sab khuch badal gaya hai...to log bhi badal gaye hai..inhe khi se dar nahi...na Ma-Bap se, na Dharma se...Dost-Dost nahi rah gaya hai...
    में माहिर हूँ...rupi is kavita me aap ne wah sab kuch kah dala hai jo aaj ke samaj ki sachyi hai..is kahi se bhi nakara nahi ja sakata hai...Bahut hi achi kavita hai...sarahaniya hai...kash is kavita ka prabhav hamare samaj par padata aur ham kuch sudghar pate...Dhanyavaad...

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  7. मैं ....
    जोड़ने में नहीं
    तोड़ने में माहिर हूँ

    -आजकल ऐसे महारथियों का ही बोलबाला है.

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  8. बबन जी..........सही कहा.......//जोड़ने में नहीं
    तोड़ने में माहिर हूँ //..........तोडना है ही बहुत आसान.....कोई बंधन नहीं.कोई चिंता नहीं........किसी के लिए कुछ करना ही नहीं......पर जोड़े रखने के लिए......दिन भर कि मशक्कत ... रात दिन पसीना बहाना......जुड़े रहने के लिए क्या कुछ नहीं करना पड़ता.......इसलिए प्रचालन बढ़ता जा रहा है इस चीज का......जैसे अकेले रह कर दुनिया फतह कर ही लेंगे.......पता नहीं ऐसी सोच का जन्म क्यों हुआ.........सिर्फ कायर या बुजदिल ही.....डरते हैं..जीवन कि दौड में....इसलिए...तोड़ने कि कोशिश करते हैं......और तोड़ देते हैं.जब उन्हे यह बोझ लगने लगता हैं....तो बबन जी.......यह कहना सही रहेगा अब.......हम कायर होते जा रहे हैं...........

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  9. बेहद गहन चिन्तन्……………सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  10. आजकल की मानसिकता का प्रतिनिधित्व करती सशक्त रचना।

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  11. बबनजी,
    यह क्या कोई परिवार के अन्दर ही आतंकवादी है क्या जो अपने ही लोगों को आतंकित करके रखता है...

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  12. सुन्दर अभिव्यक्ति..सशक्त रचना....।

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  13. कितना सरल होता है ....
    तोडना
    माँ -पिता के सुनहले सपने
    दोस्ती का मजबूत धागा
    अग्नि का सात फेरा
    और धर्म का घेरा ॥

    जोड़ना बड़ा कठिन है
    और मैं ....
    जोड़ने में नहीं
    तोड़ने में माहिर हूँ ॥

    बहुत ही सुंदर ...दिल खुश हो गया.

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  14. जी आज यही अक्सर जीवन का हिस्सा बन गया है

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  15. कितना सरल होता है ....
    तोडना
    माँ -पिता के सुनहले सपने
    दोस्ती का मजबूत धागा
    अग्नि का सात फेरा
    और धर्म का घेरा ॥

    -------

    A bitter truth !

    Most of us are expert in such affairs

    ..

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  16. वन्दे मातरम बन्धु,
    बहुत ही सुंदर शब्दों मैं आपने आज की मानसिकता का वर्णन किया है
    आपके लेखन मैं गजब की रवानी है......... मैंने एक सार्वजनिक ब्लाग बनाया है ......... आप उस पर आकर लिखेंगे तो मुझे ख़ुशी होगी ........ हमारा मकसद अपने विचारों को अधिकाधिक लोगों तक पहुचाना है,

    http://bharatakta.blogspot.com/

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  17. वन्दे मातरम बबन जी,
    भारत एकता पर आपका स्वागत है आप मुझे क्रपया अपनी g-mail I.D. दे जिस पर मैं आपको रिक्वेस्ट भेजूंगा. आप जैसे ही उसे ओके करेंगे आपके ब्लाग डेशबोर्ड पर भारत एकता ब्लॉग दिखाई देने लगेगा इस पर आप लिखना शुरू कर सकते हैं

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