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मंगलवार, 19 अक्तूबर 2010

अब ताली नहीं, ताल ठोकिये

मंच के भाषणों से
निकलती है लुभावनी बातें
मानो पटाखों से निकलती हो
रंग -बिरंगी रौशनी
शोर मचाती है
कर्णप्रिय लगती है
लोग तालियाँ बजाते हैं ॥

फिर ....
मंच के सारे वादे/कसमे
बुझ जाती है
पटाखों की तरह
बिना अग्निशामक यंत्र के ॥

मित्रो ...
अब समय आ गया है
तालियाँ बजाने की नहीं
ताल ठोकने की ॥

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सच्ची बात लिखी है आपने .

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  2. ताल किसके सामने ठोके . और ठोके कैसे किसी के पास समय ही नहीं है.

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  3. बबन जी .............बिलकुल सही बात कही आपने............कि..........अब ताली बजाकर नहीं इन नेता लोगो से ताल ठोक कर पूछने का वक्त है................कि ............क्या काम हुआ...........क्या नहीं..............ओर नहीं तो क्यों नहीं..............चुनाव के भाषण के मंच के माहोल को .दिवाली के माहोल से जोड़कर...............बहुत बढिया प्रयास किया हैं आपने.....

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  4. बबन जी, ये मंचों कि बातें मकानों तक नहीं पहुँचती... ताली और ताल के चक्कर में हम आम आदमी बस पिसे जा रहे हैं | कोई इस ताल का संगत नहीं मिलाता

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  5. tali bajane main bahut hath uthte hain par tal ke liye kitne uthenge..??????

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  6. बबन भाई...निसंदेह आपकी प्रत्‍येक रचना दमदार होती है, एक संदेश देती, आहवान करती। जय हो।

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  7. बहुत खूब बबन जी नेता तो अभिनेता है.. और हम ताली ही बजाते उसे देखकर सुन कर ..ताल ठोकने का समय तो पता नही कब आयेगा

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  8. मित्रो ...
    अब समय आ गया है
    तालियाँ बजाने की नहीं
    ताल ठोकने की ॥
    --
    रचना के भाव प्रेरक हैं!

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  9. मित्रो ...
    अब समय आ गया है
    तालियाँ बजाने की नहीं
    ताल ठोकने की ॥
    ......बिलकुल सही बात कही आपने
    बबन पाण्डेय जी उम्दा रचना........बधाई.

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  10. bahut khoob Baban ji aajkal ke neta, abhinetao se kam nhi hai, hath jodker sharafat ke putle banker bade pyar se vaade karte hai, aur ham mantr mugdh hoker taali peette hai aur jindabaad ke naare lagate hai, lekin aaj vaqt aa gaya hai apni aankhon per padi patti hatane ka, aur taal thhokker unse jaawab mangne ka apne sawalo ke....

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  11. बबनजी,
    ताली ठोकना तो बन्द करना ही होगा, पर ताल ठोकने से भी काम नहीं बनने वाला... ठोकना होगा झूठे वादो के भाषण देनेवालो की खोपडीयां...

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  12. ताल ठोंकने के मुहावरे का बेहतरीन प्रयोग.
    वैसे भी तालियों के लिए अदद दो हथेलियों की जरूरत होती है.. ताल तो एक हाथ से ही ठुकता है.. :))

    शशिभाई और मधुसूदनजी प्रतिक्रियाएँ सम्यक लगीं.

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  13. अब समय आ गया है
    तालियाँ बजाने की नहीं
    ताल ठोकने की

    -सही कहा!!

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  14. सुन्दर कविता सुन्दर सन्देश. पर ताल ठोकने आगे कौन आएगा यह सवाल बड़ा है.

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  15. Babanji, Jan chetna ka aapka prayaas achcha hai........likhte rahiye. Taali ki gadgadahat to bheed ki achchi lagti hai....Taal thokne ke liye ek ki shuruaat bhi kaafi hai.

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  16. Baban bahi...Ek bar phir sunder rachna....Tall thokne se bhi in netaon par koi asar nahi hoga yeh log TAAL PROOF aur GAALI PROOF hote hain....!

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