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शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

ये इश्क है क्या ...


इश्क को हर लोगों ने अपने -अपने तरीके से देखा है ....मैं ne भी
इश्क एक खट्टी इमली है
हर उम्र में फिसली है
इश्क उमड़ती है
इश्क घुमड़ती है
और इश्क की तितली
हर फूलों पर मचलती है


फूलों की तरह खिलती है
टूटने पर मुरझाती है
क्या इश्क कुराफाती है ?


दोस्तों ...
इश्क रों में रहती है
तभी तो
सुहागन तलाक शुदा
और तलाक -शुदा सुहागन बन जाती है ॥
इश्क गांवो में भी रहती है
तभी तो
चार बच्चों की माँ
अपने कुआरे देवर संग भाग जाती है ॥

8 टिप्‍पणियां:

  1. :
    बबनजी,
    प्यार दिवाना होता है, मस्ताना होता है,
    हर खुशी से, हर गम् से, बेगाना होता है...

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  2. कलियुग की ये सब निशानीयाँ है बबन भाई . आपने बिलकुल सत्य लिखा है अपने विचारों को कविता में ढालकर.

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  3. और इश्क की तितली
    हर फूलों पर मचलती है - Babanji kya kaha hai

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  4. बहुत खूब इश्क हकीकत है, हर शहर , हर गाँव में, इसपे पहरे ख़त्म कर देना चाहिए, इसे जाति, संप्रदाय, भाषा, देश, काल से आज़ाद कर देना चाहिए, पर आज़ादी मिलने पर जिम्मेवारी भी बढ़ती है, हमारी युवा पीढ़ी और हम - आप जैसे बुजुर्ग को भी इश्क पूरी जिम्मेवारी से करनी और निभानी चाहिए।

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  5. न होश तुमको, न होश हमको|
    ये बात समझ में न आती है|
    हाँ प्यार तुमसे किया था मैंने,
    पैरों तले बहती नदी लहराती है|
    बब्बन की कविता की बगिया में,
    इश्क पर नोचती है, इठलाती है|
    ----Best Post.

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  6. बबन जी ,
    इश्क खुराफाती तो कदापि हो ही नहीं सकता ,
    इश्क तो जीवन का पहला फलसफा है .
    इश्क तो जीवन की मंजिल है ....
    कुछ सीमाएं और मर्यादाओं का ध्यान रहे !
    इश्क में बहकते कदमो से रिश्तों की प्रासंगिकता
    कैसे तहस -नहस होती है ----इसको दर्शाती उम्दा रचना !

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  7. Baban ji me Saroj ji ki baat se purntaya sahmat hu, Iskq filmi gaane ki tarah nhi hai, jo aaj jubaan per chad gaya, aur kal kafoor ho gaya, Iskq ek jajba hai Ibadat hai, Ishq jeevan jeene ki kala hai, ha uski kuch maryada hai, jinhe todne per iski prasangikta per parshan chinh lagne suru ho jaate hai.....aaj ke parivesh ki vastavikta ko darshati ek umda rachna.........

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  8. Shri Baban bhai, aaj ke parivesh ke hisab se aap ne bahut hi acha lika hai ki*****तभी तो
    सुहागन तलाक शुदा
    और तलाक -शुदा सुहागन बन जाती है ॥
    इश्क गांवो में भी रहती है
    तभी तो
    चार बच्चों की माँ
    अपने कुआरे देवर संग भाग जाती है ॥****
    ye kalyug ka nisani hai. Ki Ma aapne hi aulad ko chod kar aur patni aapne hi pati ko chad kar kisi aur ke sath chali jati hai..."LEKIN HAM PURUSH SAMAJ BHI IS ME KAHI NA KAHI DOSI HAI."

    BHAIJI, MUJHE AAP KE HAR EK RACHANA ME SAMAJIK UTHAN KI KHUSBU AATI HAI...DHANYAVAAD...MA SARASWATI AAP KE KALAM KO AUR SHAKTI DE..

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