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गुरुवार, 22 जुलाई 2010

ये कैसी विडंवना है प्रभु

ये कैसी विडंवना है प्रभु
मेरे पास पैसे नहीं है
तो भूख का ज्वार उठता है
उनके पास पैसे है तो
उन्हें .....
...भूख ही नहीं लगती "


ये कैसी विडंवना है प्रभु

मेरे पास कुदाल है
दो ताकतवर हाथ है
पर खेत नहीं है
उनके पास खेत तो है
पर कुदाल नहीं है

1 टिप्पणी:

  1. Babban jee...bahut khoob kaha hai aapne.

    ये कैसी विडंवना है प्रभु
    मेरे पास पैसे नहीं है
    तो भूख का ज्वार उठता है
    उनके पास पैसे है तो
    उन्हें .....
    ...भूख ही नहीं लगती "
    lekin bhookh to unhe bhi bahut lagti hai. ..bas fark hai bhookh bhookh main. ..hume do wqt ki roti ki bhookh hai..aur unhe doulat ki bhookh hai ..hamari bhookh 2 roti khaane se shant ho jati hai aur unki jeb bharne ke baad unki bhookh aur badh jati hai.

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