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मंगलवार, 27 मई 2014
शुक्रवार, 23 मई 2014
कब आएगी खुशबू इन मकानों से
कोई खुशबु नहीं होती...
सीमेंट में
बालू में
बजरी में
और लोहे की सरियों में
मगर...
जब सब मिलते है तो
बनता है मकान //
सीमेंट में
बालू में
बजरी में
और लोहे की सरियों में
मगर...
जब सब मिलते है तो
बनता है मकान //
मकान....
भींगने से बचने के लिए नहीं है...
मकान....
तलाक के कागज पर दस्खत करने की जगह नहीं है
मकान ....
दुश्मन को परास्त करने का प्लान बनाने की जगह भी नहीं ..
मकान तो एक गर्भ है..
जहां ..
प्रेम और प्यार का बीज पनपता है ..//
और जब...
यह पनपता है..
तो आने लगती है खुशबु मकान से
गुरुवार, 8 मई 2014
शनिवार, 22 फ़रवरी 2014
कुत्ते घोसला नहीं बनाते !
कुत्ते घोसला नहीं बनाते !
बुझे राख की आग पर बैठ
गुजार लेते है अपना वक़्त
चुप रहते है
जब तक खिलाता है कोई
मख्खनदार बिस्कुट
खाने के लिए
पिने के लिए
और झगड़ पड़ते है
किसी कुतिया के लिए भीं
गौर फरमाएं ...
शायद की कोई
हिन्दू गली का कुत्ता
मुसलमान को देखकर ना भूके
या फिर मुस्लिम गली का कुत्ता
हिंदुओं को देखकर//
और सबसे बड़ी बात
सिर्फ सड़क छाप कुत्ते ही नहीं
पालतू कुत्ते भी काट लेते है
मालिक को
वैसे कुत्ते चुनिए
जो भौकने के अलावे
और भी कुछ जानता हो
और
न करता हो पेशाब इधर-उधर
अपनी टांगें उठाकर //
बुझे राख की आग पर बैठ
गुजार लेते है अपना वक़्त
चुप रहते है
जब तक खिलाता है कोई
मख्खनदार बिस्कुट
खाने के लिए
पिने के लिए
और झगड़ पड़ते है
किसी कुतिया के लिए भीं
गौर फरमाएं ...
शायद की कोई
हिन्दू गली का कुत्ता
मुसलमान को देखकर ना भूके
या फिर मुस्लिम गली का कुत्ता
हिंदुओं को देखकर//
और सबसे बड़ी बात
सिर्फ सड़क छाप कुत्ते ही नहीं
पालतू कुत्ते भी काट लेते है
मालिक को
वैसे कुत्ते चुनिए
जो भौकने के अलावे
और भी कुछ जानता हो
और
न करता हो पेशाब इधर-उधर
अपनी टांगें उठाकर //
रविवार, 2 फ़रवरी 2014
आग से
तुम कितने डरपोक हो आग
घर भी जलाते हो तो गरीबों का //
देखो तो ..
तुम्हारे सात फेरे लेकर
किये गए वादे
टूट रही है भरभराकर
तुम गला देते हो .
लोहे और अलमुनियम
बना देते ही ईट
कच्ची मिटटी से
तुम कब जला पाओगे
आदमी के लोभ/लालच/काम/क्रोध
मगर !
और धन लोलुप्ता
तुम्हारा कमाल एक ही बार दिखा है ..
जब प्रह्लाद को न जलाकर
,तुमने जला दिया था होलिका को //
घर भी जलाते हो तो गरीबों का //
देखो तो ..
तुम्हारे सात फेरे लेकर
किये गए वादे
टूट रही है भरभराकर
तुम गला देते हो .
लोहे और अलमुनियम
बना देते ही ईट
कच्ची मिटटी से
तुम कब जला पाओगे
आदमी के लोभ/लालच/काम/क्रोध
मगर !
और धन लोलुप्ता
तुम्हारा कमाल एक ही बार दिखा है ..
जब प्रह्लाद को न जलाकर
,तुमने जला दिया था होलिका को //
पर उपदेश कुशल बहुतेरे
हर कोई सिखाता है ,गिर कर उठने का हुनर
फिर पता चलता है
सिखाने वाला खुद गिरा हुआ था //
हर कोई सिखाता है ,सत्य पर चलने का हुनर
फिर पता चलता है
सिखाने वाला अनाड़ी था//
हर कोई संकल्प दिलाता है ,चोरी करना पाप है
फिर पता चलता है ..
सीखने वाला चोरो का सरदार है //
बाबा और संत सिखाते है ,चरित्र दृढ रखने के गुण
फिर पता चलता है
उनसे ज्यादा चरित्र हिन् कोई नहीं //
फिर पता चलता है
सिखाने वाला खुद गिरा हुआ था //
हर कोई सिखाता है ,सत्य पर चलने का हुनर
फिर पता चलता है
सिखाने वाला अनाड़ी था//
हर कोई संकल्प दिलाता है ,चोरी करना पाप है
फिर पता चलता है ..
सीखने वाला चोरो का सरदार है //
बाबा और संत सिखाते है ,चरित्र दृढ रखने के गुण
फिर पता चलता है
उनसे ज्यादा चरित्र हिन् कोई नहीं //
शुक्रवार, 31 जनवरी 2014
इन्द्रियाँ
पौरुष इन्द्रियाँ
सुसुप्त ज्वालामुखी होती हैं ..
पता नहीं..कब भड़क उठे
यह ज़रूरी नहीं
स्पर्श हो ही किसी सुंदरी का
हो सकता है
यह जाग उठे ,सिर्फ घुंघुरू की आवाज से
प्रचोदित हो उठता है
मोहक गंध से
या फिर किसी भवरे को
फूलों पर बैठा देखकर ...
कितना आसान होता है
किसी का दिल जीतना
असली विजेता तो वही है ..
जिसने जीत लिया इंद्रियों को //
सुसुप्त ज्वालामुखी होती हैं ..
पता नहीं..कब भड़क उठे
यह ज़रूरी नहीं
स्पर्श हो ही किसी सुंदरी काहो सकता है
यह जाग उठे ,सिर्फ घुंघुरू की आवाज से
प्रचोदित हो उठता है
मोहक गंध से
या फिर किसी भवरे को
फूलों पर बैठा देखकर ...
कितना आसान होता है
किसी का दिल जीतना
असली विजेता तो वही है ..
जिसने जीत लिया इंद्रियों को //
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